मनामा, 08 मार्च (वार्ता) बहरीन के गृह मंत्रालय ने कहा है कि ईरानी ड्रोन हमले के कारण बहरीन के एक जल शुद्धीकरण संयंत्र को नुकसान पहुंचा है।
यह घटना ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के उस बयान के एक दिन बाद हुई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका ने दक्षिणी ईरान के क़ेश्म द्वीप पर एक जल शुद्धीकरण संयंत्र पर हमला किया है, जो अपने आप में एक ‘मिसाल’ है। बहरीन के इस बयान के बाद ईरान की ओर से फिलहाल कोई तत्काल प्रतिक्रिया सामने नहीं आयी है। खाड़ी के अधिकतर देश अपने निवासियों की खपत के लिए मुख्य रूप से जल शुद्धीकरण पर ही निर्भर हैं। बहरीन ने कहा है कि एक ईरानी ड्रोन ने जल शुद्धीकरण संयंत्र पर हमला किया। पिछले नौ दिनों से जारी युद्ध के दौरान यह पहली बार है, जब किसी अरब देश ने ईरान की ओर से जल शुद्धीकरण संयंत्र को निशाना बनाये जाने का दावा किया है। यह घटना तब हुई है, जब ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि अमेरिका ने देश के दक्षिणी द्वीप क़ेश्म में ईरान के जल शुद्धीकरण संयंत्र को निशाना बनाया है। nखाड़ी देशों में प्राकृतिक मीठे पानी के संसाधन अत्यंत सीमित हैं। इस कारण पानी की जरूरतों को पूरा करने के लिए वे ऊर्जा-गहन समुद्री जल विलवणीकरण पर निर्भर रहते हैं।
‘ वॉशिंगटन डीसी के अरब सेंटर’ के प्रकाशित शोध पत्र के अनुसार, ये संयंत्र कितने महत्वपूर्ण हैं, इसे समझने के लिए यहाँ कुछ आंकड़े दिए गये हैं-
खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के सदस्य देश वैश्विक जल शुद्धीकरण क्षमता का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा रखते हैं और इस पूरे क्षेत्र में 400 से अधिक शुद्धीकरण संयंत्रों के माध्यम से दुनिया के कुल विलवणीकृत जल का लगभग 40 प्रतिशत उत्पादन करते हैं। अधिकतर जीसीसी देश पानी की जरूरतों के लिए इन संयंत्रों पर निर्भर हैं। संयुक्त अरब अमीरात के पीने के पानी का लगभग 42 प्रतिशत हिस्सा शुद्धीकरण संयंत्र से आता है, जबकि कुवैत में यह 90 प्रतिशत, ओमान में 86 प्रतिशत और सऊदी अरब में 70 प्रतिशत है। nअकेले सऊदी अरब किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक विलवणीकृत जल का उत्पादन करता है। नयी परियोजनाओं में 80 अरब डॉलर के निवेश के बाद 2025 तक इसकी क्षमता 85 लाख घन मीटर (30 करोड़ घन फीट) प्रतिदिन पहुंचने की उम्मीद थी।

