पानी नहीं तो करेंगे योजनाओं का बहिष्कार 

सीहोर/इछावर। नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना से वंचित रह गए इछावर तहसील के दर्जनभर गांवों में अब आक्रोश खुलकर सामने आने लगा है. ग्राम दुदलई में उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई जब बिजली वितरण कंपनी की टीम घरों में स्मार्ट मीटर लगाने पहुंची. ग्रामीणों ने एकजुट होकर इसका विरोध किया और किसी भी घर में स्मार्ट मीटर लगाने की अनुमति नहीं दी. विरोध के चलते बिजली कंपनी की टीम को बिना मीटर लगाए ही गांव से लौटना पड़ा.

इस दौरान ग्रामीणों ने शासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए चेतावनी दी कि यदि उनके गांवों को नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना में शामिल नहीं किया गया तो वे शासन की योजनाओं का बहिष्कार करने परमजबूर होंगे. ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से पानी की समस्या झेल रहे इन गांवों को परियोजना से बाहर रखना उनके साथ अन्याय है.

क्षेत्रवासियों के अनुसार शासन द्वारा जिले में पेयजल आपूर्ति और किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करोड़ों रुपए की लागत से नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना शुरू की जा रही है. इस महत्वाकांक्षी योजना से कई गांवों को लाभ मिलने की उम्मीद है, लेकिन इछावर तहसील के कुछ गांव अब भी इससे वंचित हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आर्या, दौलतपुर, दुदलई, लालियाखेड़ी, कुंडीखाल, हरसपुर, रूपादा, रूपदी, दुडलावा सहित आसपास के कई गांवों को इस योजना में शामिल नहीं किया गया है.

ग्रामीणों ने बताया कि इन गांवों में गर्मी के मौसम की शुरुआत होते ही जलसंकट गहराने लगता है. कई स्थानों पर पीने के पानी के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ती है, वहीं किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नहीं मिल पाने से फसल उत्पादन भी प्रभावित होता है. ऐसे में जब नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना की पाइपलाइन गांवों की सीमा से होकर गुजर रही है, तब भी गांवों को इसका लाभ नहीं मिलना ग्रामीणों को बेहद खल रहा है.

समस्या नहीं सुलझी तो ग्रामीण करेंगे आंदोलन

ग्राम दुदलई के किसान राजेश जाट, पन्नालाल, कैलाश जाट, जगदीश शर्मा, रामेश्वर, महेश और संतोष सहित अन्य ग्रामीणों का कहना है कि वे कई बार वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से मिलकर अपनी समस्या रख चुके हैं, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया. ग्रामीणों के अनुसार यदि समय रहते समाधान नहीं किया गया तो वह आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होंगे. सरपंच रामचरण बामनिया और योगेश जाट ने बताया कि परियोजना से वंचित अधिकांश गांव पठारी क्षेत्र में स्थित हैं, जहां गर्मी के शुरुआती दिनों में ही पानी की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है. इसके बावजूद इन गांवों को योजना से बाहर रखा जाना समझ से परे है. ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने इस संबंध में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को आवेदन देकर मांग उठाई है. बावजूद इसके अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है.

स्मार्ट मीटर लगाने गई टीम बैरंग लौटी

इधर बिजली वितरण कंपनी के जेई विजय कुमार यूईके ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगाने के लिए टीम ग्राम दुदलई पहुंची थी, लेकिन ग्रामीणों ने विरोध करते हुए मीटर लगाने नहीं दिए. विरोध के कारण टीम को वापस लौटना पड़ा. ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही उन्हें नर्मदा-पार्वती लिंक परियोजना में शामिल नहीं किया गया तो वे शासन की योजनाओं का बहिष्कार करते हुए आंदोलन को और तेज करेंगे.

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