ग्वालियर: ग्वालियर डिवीजन चिल्ड्रन बुक सेलर एसोसिएशन के प्रतिनिधिमण्डल ने चेम्बर ऑफ कॉमर्स के पदाधिकारियों से मुलाकात कर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित किए जाने वाले पुस्तक मेले में आने वाली व्यवहारिक कठिनाइयों से अवगत कराया। व्यापारियों का कहना है कि पुस्तकों के विक्रय में जब ‘मोनोपॉली’ (एकाधिकार) व्यवस्था ही नहीं है, तो उन्हें मेले में दुकान लगाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।
एसोसिएशन के अध्यक्ष धनराज सेवानी और सचिव अनूप सिंघल के नेतृत्व में मिले प्रतिनिधिमण्डल ने बताया कि अधिकांश दुकानों का संचालन इकलौते संचालक द्वारा किया जाता है। ऐसे में दुकान और मेले में स्टॉल, दोनों को एक साथ संभालना संभव नहीं है। साथ ही, सारा स्टॉक अस्थाई रूप से मेले में ले जाना सुरक्षा की दृष्टि से भी जोखिम भरा है, जहाँ चोरी, आग और बारिश (पानी) का भय बना रहता है। व्यापारियों का तर्क है कि एक या दो दुकानों में वैरायटी के अनुसार पूरा स्टॉक प्रदर्शित करना भी मुमकिन नहीं है।
प्रतिनिधिमण्डल ने स्पष्ट किया कि वे जिला प्रशासन की मंशा, ग्राहकों को उचित डिस्काउंट दिलाने और किसी विशेष दुकान से किताब खरीदने की बाध्यता खत्म करने का पूरा समर्थन करते हैं। इसके लिए व्यापारियों ने प्रस्ताव दिया है कि वे अपनी दुकानों के प्रमुख स्थान पर बड़े अक्षरों में डिस्काउंट का डिस्प्ले बोर्ड लगाएंगे।बोर्ड पर स्पष्ट लिखा होगा कि ग्राहक किसी भी विशेष दुकान से सामग्री (ड्रेस/स्टेशनरी) खरीदने के लिए बाध्य नहीं है। ग्राहकों को उनकी पसंद की किताबें ही उपलब्ध कराई जाएंगी, अन्य सामग्री खरीदने का दबाव नहीं बनाया जाएगा।
