ज्यामिति, प्रकाश और मौन के जरिए रचनात्मक संतोष की तलाश: नीरजा पीटर्स

नई दिल्ली। रचनात्मक संतोष अक्सर अचानक प्राप्त होने वाला क्षण नहीं होता, बल्कि यह निरंतर साधना, अनुशासन और धैर्य से धीरे-धीरे विकसित होता है। समकालीन कलाकार नीरजा पीटर्स की कला इसी शांत और गहन प्रक्रिया का परिणाम है। उनकी कृतियों में यह संतोष किसी घोषणा के रूप में नहीं, बल्कि संयम, पुनरावृत्ति और मौन के साथ बढ़ते आत्मीय संबंध के रूप में दिखाई देता है।

नीरजा पीटर्स की कला यात्रा वर्षों के प्रयोग, खोज और अनुभव से गुजरी है। प्रारंभिक दौर में उन्होंने यथार्थवादी शैली में काम किया, जिसने उन्हें सूक्ष्म अवलोकन और तकनीकी सटीकता प्रदान की। बाद के वर्षों में उन्होंने विभिन्न माध्यमों और रूपों में प्रयोग किए। उनकी परिपक्व कृतियों में ज्यामिति प्रमुख संरचनात्मक तत्व के रूप में उभरती है। ग्रिड, अक्ष और क्षितिज जैसी संरचनाएँ चित्रों में संतुलन और स्थिरता लाती हैं, जिससे सीमित दायरे में भी रचना को विस्तार का अनुभव मिलता है।

उनकी कला में संयम और स्पष्टता विशेष महत्व रखते हैं। जटिलता की बजाय अब वे सादगी और संतुलन को प्राथमिकता देती हैं। प्रत्येक रचना सोच-समझकर बनाई गई प्रतीत होती है, जिसमें कलाकार की सहज समझ दिखाई देती है कि रचना कब पूर्ण हो जाती है। यह परिवर्तन खोज से आत्मविश्वास की ओर बढ़ते कदम को दर्शाता है।

रंगों का प्रयोग भी उनकी कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उनकी रंग योजना भारतीय दर्शन में वर्णित प्रातःकाल के उस आध्यात्मिक क्षण से प्रेरित है जिसे ब्रह्म मुहूर्त या अमृत वेला कहा जाता है। वे सीधे सूर्योदय का चित्रण नहीं करतीं, बल्कि उभरते प्रकाश की कोमलता, अंधकार के धीरे-धीरे समाप्त होने और स्थिरता में छिपी संभावनाओं को रंगों के माध्यम से व्यक्त करती हैं।

उनकी कृतियों की एक विशिष्ट पहचान असेमिक राइटिंग है,ऐसे अमूर्त चिह्न जो प्राचीन लिपियों, तांत्रिक आरेखों या ब्रह्मांडीय नक्शों की याद दिलाते हैं। ये चिह्न पढ़े जाने के लिए नहीं बल्कि अनुभव करने के लिए होते हैं। सतह पर बार-बार उकेरे गए ये संकेत किसी दृश्य मंत्र की तरह कार्य करते हैं और चित्रांकन की प्रक्रिया को एक ध्यानमय साधना में बदल देते हैं।

चित्रों में पक्षी जैसे आकार और रेखाओं की क्रमिक संरचनाएँ भी दिखाई देती हैं, जो गति और परिवर्तन का संकेत देती हैं। हालांकि ये तत्व रचना पर हावी नहीं होते, बल्कि उसकी शांत और ध्यानपूर्ण प्रकृति को और गहरा बनाते हैं।

नीरजा पीटर्स की रचना प्रक्रिया धीमी और एकाग्रता से भरी है। तेज़ गति और अतिरेक से भरे समकालीन कला परिवेश के विपरीत उनकी कला धैर्य और गहन ध्यान का मार्ग अपनाती है। इसी प्रक्रिया में उन्हें आनंद का अनुभव होता है, जहाँ सृजन और सर्जक के बीच की दूरी मिटने लगती है।

नीरजा पीटर्स की कला दर्शकों को प्रभावित करने या चकित करने का प्रयास नहीं करती। बल्कि वह ज्यामिति, प्रकाश और मौन के माध्यम से एक ऐसा चिंतनशील संसार प्रस्तुत करती है, जहाँ रचनात्मक संतोष उपलब्धि में नहीं बल्कि आत्मिक संतुलन और शांति में निहित है।

 

 

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