
वाशिंगटन। अमेरिका में आयात शुल्क को लेकर चल रहे विवाद में अदालत ने कंपनियों के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया है। अमेरिकी ट्रेड कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया है कि जिन कंपनियों से पिछले वर्ष लगाए गए टैरिफ के तहत राशि वसूली गई थी, उसे वापस किया जाए। यह आदेश ऐसे समय आया है जब सुप्रीम कोर्ट पहले ही इन टैरिफ को अवैध करार दे चुका है।
दरअसल, पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा था कि इमरजेंसी अधिकारों के तहत लगाए गए ये टैरिफ कानून के दायरे में नहीं आते। अदालत का कहना था कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) राष्ट्रपति को इस तरह के आयात शुल्क लगाने की अनुमति नहीं देता।
इसी फैसले के आधार पर यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड के जज रिचर्ड ईटन ने कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन विभाग को आदेश दिया कि जिन आयातकों ने इन शुल्कों का भुगतान किया है, उन्हें पूरी राशि लौटाई जाए। उन्होंने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि ऐसे सभी आयातक, जिनकी एंट्रीज IEEPA के तहत लगाई गई ड्यूटी के दायरे में थीं, वे सुप्रीम कोर्ट के फैसले का लाभ पाने के हकदार हैं।
यह मामला टेनेसी की एक फिल्ट्रेशन कंपनी की याचिका से शुरू हुआ था, लेकिन अदालत ने संकेत दिया है कि इससे जुड़े अन्य सभी मामलों की सुनवाई भी वही करेंगे। माना जा रहा है कि इस फैसले से सैकड़ों कंपनियों को राहत मिलेगी।
गौरतलब है कि पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पिछले वर्ष अप्रैल में तथाकथित लिबरेशन डे टैरिफ लागू किए थे। इन शुल्कों की दर अलग-अलग देशों के लिए 10 से 50 प्रतिशत तक रखी गई थी। इनसे अमेरिकी सरकार को लगभग 130 अरब डॉलर की आमदनी हुई थी, लेकिन अदालत के ताजा आदेश के बाद अब बड़ी राशि कंपनियों को लौटानी पड़ सकती है।
