तेहरान | अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष आज छठे दिन में प्रवेश कर गया है और स्थिति बेहद विस्फोटक हो गई है। एक बड़े राजनीतिक घटनाक्रम में, अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति ट्रंप की सैन्य कार्रवाई ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को रोकने वाले ‘वॉर पावर्स प्रस्ताव’ को वोटिंग के जरिए खारिज कर दिया है। इससे ट्रंप को ईरान के खिलाफ युद्ध जारी रखने की खुली छूट मिल गई है। इस बीच, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीटर हेगसेथ ने पुष्टि की है कि श्रीलंका के पास एक ईरानी युद्धपोत (IRIS देना) को डुबो दिया गया है, जिसमें सवार 180 नाविकों में से 87 के शव बरामद हुए हैं, जबकि कई अभी भी लापता हैं।
युद्ध की आग अब ईरान की राजधानी तेहरान तक पहुँच गई है, जहाँ बुधवार सुबह भीषण धमाके सुने गए। इजराइली सेना ने दावा किया है कि वे ईरानी नेतृत्व और सुरक्षा बलों के ठिकानों को चुन-चुनकर निशाना बना रहे हैं। जवाब में ईरान ने भी इजराइल और क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों पर 500 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और 2,000 ड्रोन दागकर पलटवार किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, सऊदी अरब और यूएई में अमेरिकी दूतावासों पर भी ड्रोन हमले हुए हैं, जिसके बाद अमेरिका ने अपने गैर-जरूरी सरकारी कर्मचारियों को क्षेत्र छोड़ने के आदेश जारी कर दिए हैं।
इस भीषण युद्ध का असर अब पूरी दुनिया की जेब पर पड़ने लगा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) पर ईरान के नियंत्रण और तेल टैंकरों की आवाजाही रुकने से कच्चे तेल की कीमतें 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं, जो जुलाई 2024 के बाद का उच्चतम स्तर है। तेल की कीमतों में 13 प्रतिशत के उछाल और वैश्विक शेयर बाजारों में आई भारी गिरावट ने आर्थिक मंदी का डर पैदा कर दिया है। अब तक इस युद्ध में ईरान में लगभग 1040 लोग मारे जा चुके हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के आक्रामक रुख को देखते हुए यह संघर्ष जल्द थमता नजर नहीं आ रहा है।

