चेन्नई | तमिलनाडु की द्रमुक (DMK) सरकार ने विधानसभा चुनावों की आहट के बीच राज्य के कमजोर वर्गों के लिए खजाना खोल दिया है। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने आज घोषणा की कि राज्य के लगभग 37.79 लाख बुजुर्गों, दिव्यांगों और निराश्रित महिलाओं के बैंक खातों में 2,000 रुपये की विशेष सहायता राशि सीधे हस्तांतरित (DBT) कर दी गई है। यह राशि लाभार्थियों को मार्च महीने की उनकी नियमित पेंशन के साथ अतिरिक्त बोनस के रूप में दी गई है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस कदम से विधवाओं और बुजुर्गों को अब कुल 3,200 रुपये, जबकि गंभीर रूप से दिव्यांग व्यक्तियों को 4,000 रुपये तक की आर्थिक मदद मिली है।
पेंशनभोगियों के अलावा मुख्यमंत्री ने राज्य के अन्य कामकाजी समुदायों के लिए भी राहत पैकेज का ऐलान किया है। समुद्र में मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि (अप्रैल से जून) के दौरान आजीविका के संकट को देखते हुए 1.62 लाख मछुआरा परिवारों को 8,000 रुपये प्रति परिवार की सहायता प्रदान की जा रही है। साथ ही, नीलगिरी जिले के करीब 15 हजार लघु चाय किसानों के समर्थन मूल्य के लिए 8.53 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। मुख्यमंत्री स्टालिन ने सोशल मीडिया पर कहा कि उनकी सरकार समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुँचाने के अपने वादे को पूरा कर रही है।
सरकार के इस भारी-भरकम नकद वितरण पर राज्य की सियासत गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल AIADMK, भाजपा और अभिनेता विजय की पार्टी TVK ने इसे “चुनावी रिश्वत” करार दिया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि विधानसभा चुनाव नजदीक देख सरकार हार के डर से जनता को प्रलोभन दे रही है। विपक्ष ने सरकार द्वारा तीन महीने की अग्रिम पेंशन देने के फैसले को भी चुनाव आचार संहिता लागू होने से पहले की एक सोची-समझी चाल बताया है। चुनावी माहौल में नकद राशि का यह सीधा हस्तांतरण अब तमिलनाडु की राजनीति में चर्चा का सबसे बड़ा केंद्र बन गया है।

