तेहरान | अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के चौथे दिन ईरान ने अपनी जवाबी कार्रवाई को आक्रामक रूप दे दिया है। ईरान ने बहरीन में स्थित अमेरिकी एयर बेस पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया है, जिससे वहां भारी नुकसान की खबर है। सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने पश्चिमी ताकतों के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। जवाबी कार्रवाई में न केवल अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा है, बल्कि इजरायल के प्रमुख शहरों पर भी ताबड़तोड़ मिसाइलें दागी जा रही हैं। इस सीधा सैन्य संघर्ष ने पूरी दुनिया को एक बड़े वैश्विक युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
युद्ध की आग अब सऊदी अरब की राजधानी रियाद तक पहुँच गई है, जहाँ अमेरिकी दूतावास को रॉकेट हमलों से निशाना बनाया गया है। इस हमले के बाद दूतावास परिसर में भीषण आग लग गई और चारों ओर अफरा-तफरी मच गई। हालांकि, हमले में हुए जानी नुकसान के सटीक आंकड़े अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन सूत्रों के अनुसार दूतावास को काफी भौतिक क्षति पहुँची है। इस घटना ने खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी राजनयिकों और सुरक्षा बलों के बीच डर का माहौल पैदा कर दिया है। सऊदी अरब और अन्य पड़ोसी देश इस स्थिति पर अपनी कड़ी नजर बनाए हुए हैं।
इस युद्ध का प्रभाव अब केवल मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत सहित पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था इससे बुरी तरह प्रभावित हो रही है। अंतरराष्ट्रीय हवाई सेवाएं बाधित हो गई हैं और कच्चे तेल की कीमतों में आए भारी उछाल ने वैश्विक बाजार में महंगाई का संकट पैदा कर दिया है। सप्लाई चेन टूटने से कई देशों में जरूरी वस्तुओं की कमी होने लगी है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह संघर्ष जल्द नहीं रुका, तो आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय संबंधों और वैश्विक व्यापार पर इसके दूरगामी और विनाशकारी परिणाम देखने को मिल सकते हैं।

