किफायती, अभिनव स्वास्थ्य सेवा समाधानों की मांग साल दर साल 10 प्रतिशत से भी तेज होगी: अमित अग्रवाल

नयी दिल्ली, 30 अगस्त (वार्ता) फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव अमित अग्रवाल ने कहा है कि दुनिया की सबसे बड़ी आबादी और तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था वाले भारत में आगे के दशकों में किफायती और अभिनव स्वास्थ्य सेवा समाधानों की घरेलू मांग लगातार दस प्रतिशत से ऊंची दर से बढ़ने वाली है।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि चिकित्सा प्रौद्योगिकी क्षेत्र का मुख्य लक्ष्य मरीज़ों की भलाई और घरेलू एवं वैश्विक, दोनों बाज़ारों के लिए उच्च-गुणवत्ता वाले, किफ़ायती चिकित्सा उपकरणों के विकास पर केंद्रित रहना चाहिए। श्री अग्रवाल राजधानी में आयोजित 17वें सीआईआई ग्लोबल मेडटेक शिखर सम्मेलन में भारत के चिकित्सा प्रौद्योगिकी के उभरते केंद्र के रूप में परिवर्तन पर प्रकाश डाला। सम्मेलन का विषय था, “स्वस्थ भविष्य के लिए नवाचार – वैश्विक प्रभाव के लिए मेडटेक को आगे बढ़ाना: मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड”।

सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में चिकित्सा प्रौद्योगिकी के हितधारकों को संबोधित करते हुए कहा कि कोविड के बाद, भारत ने एमआरआई और सीटी स्कैन मशीनों, मैमोग्राफी इकाइयों, वेंटिलेटर, स्टेंट, हर्ट वाल्व, डायलिसिस मशीनों और कई प्रकार के प्रत्यारोपण उपकरणों सहित उन्नत उपकरणों के घरेलू निर्माण में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सफलतापूर्वक हासिल कर ली है। एक दशक पहले जो उत्पाद स्थानीय उत्पादन के लिए असंभव लगते थे, अब देश में ही बनाए जा रहे हैं, जो देश की बढ़ती क्षमताओं और नवाचार की पारिस्थितिकी में विकास को दर्शाता है।

उन्होंने कहा कि सरकार आगामी वर्ष में शुरू होने वाले तीन समर्पित चिकित्सा उपकरण पार्कों, उनके निरंतर बुनियादी ढांचे के उन्नयन के लिए नियोजित सहायता और चिकित्सा उपकरणों के लिए उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना का उल्लेख किया और कहा कि सरकार ने इस उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए कई प्रमुख नीतिगत कदम उठाये हैं। प्रयोगशाला से बाज़ार तक की यात्रा को तेज़ करने के लिए नवप्रवर्तकों, उद्यमियों और निवेशकों के बीच गहन सहयोग का आह्वान करते हुए कहा कि इससे देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता मज़बूत होगी।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि चिकित्सा उपकरण पार्क सुविधाओं का विस्तार, उत्पादन-आधारित प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना और पिछड़े एकीकरण के लिए सीमांत निवेश योजना जैसी लक्षित नीतिगत पहल, और जल्द ही शुरू होने वाली 5,000 करोड़ रुपये की फार्मा मेडटेक क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार संवर्धन (पीआरआईपी) योजना से भारतीय मेडटेक क्षेत्र की लागत-प्रतिस्पर्धात्मकता और उत्पादन दक्षता में वृद्धि, घरेलू मूल्य श्रृंखला का गहनीकरण और एक मजबूत नवाचार के अनुकूल औद्योगिक-पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण होगा। इससे देश न केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम बनेगा बल्कि वैश्विक उत्तर और दक्षिण दोनों को किफायती नवीन स्वास्थ्य सेवा समाधान भी प्रदान करने की स्थिति में होगा।

 

 

 

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