नई दिल्ली | ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में सुनामी ला दी है। सोमवार को घरेलू बाजार (MCX) खुलते ही सोने की कीमतों में ₹5,811 की अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई, जिससे भाव ₹1,67,915 प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गए। चांदी ने भी ₹9,492 की लंबी छलांग लगाकर ₹2,84,490 प्रति किलो का नया शिखर छू लिया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोना 2% से अधिक चढ़कर $5,390 प्रति औंस को पार कर गया है। युद्ध की विभीषिका और आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशकों ने अपनी पूंजी बचाने के लिए सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की ओर रुख किया है।
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत और उसके बाद शुरू हुए मिसाइल हमलों ने वैश्विक स्तर पर डर का माहौल पैदा कर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने की आशंका और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल ने महंगाई की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि 1973 के बाद यह पहला मौका है जब सोने ने लगातार सातवें महीने बढ़त का सिलसिला जारी रखा है। निवेशक अब सरकारी बॉन्ड और विदेशी मुद्राओं के बजाय भौतिक सोने को प्राथमिकता दे रहे हैं, क्योंकि संकट के इस दौर में यह सबसे भरोसेमंद संपत्ति साबित हो रही है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक खाड़ी देशों में युद्ध की स्थिति बनी रहेगी, सोने और चांदी की कीमतों में इसी तरह की अस्थिरता और तेजी देखने को मिल सकती है। केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की भारी खरीद और डॉलर की मजबूती के बावजूद सोने का रिटर्न इस साल अब तक 25% के करीब पहुंच गया है। रणनीतिकारों का मानना है कि वर्तमान क्षेत्रीय तनाव के बीच कीमती धातुएं ही ‘असली मजबूत मुद्रा’ के रूप में उभर रही हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए शादियों के सीजन में यह तेजी बड़ी मुसीबत बन गई है, जबकि निवेशकों के लिए यह चांदी काटने का समय है।

