नयी दिल्ली (वार्ता) कपास पर सीमा शुल्क हटाने के सरकार के फैसले को वापस लिए जाने और उसका समर्थन मूल्य बढ़ाने की मांग को लेकर विभिन्न किसान संगठनों ने सोमवार को राजधानी में जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया।
संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आंदोलन कर रहे किसान कपास पर आयात शुल्क हटाने के हाल के फैसले का विरोध करने के साथ कपास का न्यूनतम समर्थन मूल्य को वास्तविक लागत से 50 प्रतिशत से ऊपर तय करने के फॉर्मूले के साथ प्रति क्विंटल 10075 रुपए पर तय करने की मांग कर रहे थे।
धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने आत्महत्या करने वाले प्रत्येक किसान के परिवार को 25 लाख रुपए का मुआवजा दिए जाने की भी मांग रखी।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने लंबे रेशे के कपास के आयात पर भारत में लगने वाले 11 प्रतिशत शुल्क को इसी माह 19 तारीख को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। यह फैसला 30 सितंबर तक लागू रहेगा। वित्त मंत्रालय ने कहा है कि कपास पर आयात शुल्क और उसपर लगने वाले कृषि अवसंरचना विकास उपकर(एआईडीसी) को फिलहाल हटाना लोकहित में जरूरी था। किसान नेताओं ने कहा कि यह विडंबना है कि प्रधानमंत्री ने स्वाधीनता दिवस पर कहा था कि वह किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे और उसके चार दिन बाद ही सरकार ने यह किसान विरोधी फैसला ले लिया। उन्हें डर है कि आयात सस्ता होने से घरेलू बाजार में कपास की कीमतें गिरेंगी और किसान प्रभावित होंगे।
