पल्लेकेले,01 मार्च (वार्ता) सनत जयसूर्या ने श्रीलंका पुरुष टीम के हेड कोच पद से हटने का फ़ैसला कर लिया है। उन्होंने यह निर्णय पाकिस्तान के ख़िलाफ श्रीलंका की बेहद करीबी हार के बाद सार्वजनिक किया, जिसके साथ ही टीम का विश्व कप सफर भी खत्म हो गया। हालांकि उन्होंने आधिकारिक तौर पर अभी तक श्रीलंका क्रिकेट (एसएलसी) को इसकी सूचना नहीं दी है, लेकिन उनका कहना है कि वह पहले ही तय कर चुके थे कि यह विश्व कप इस भूमिका में उनका आख़िरी असाइनमेंट होगा।
जयसूर्या ने कहा, “मुझे लगा कि अब यह ज़िम्मेदारी किसी और को देने का वक़्त आ गया है। इसीलिए लगभग दो महीने पहले इंग्लैंड सीरीज के दौरान मैंने कहा था कि इस नौकरी में लंबे समय तक बने रहने की मुझे उम्मीद नहीं है। तब तक मैं यह फ़ैसला कर चुका था। मैंने सोचा था कि विश्व कप में अच्छे नोट पर कोच के तौर पर विदा ले पाऊंगा। लेकिन मैं वैसा नहीं कर सका जैसा चाहता था, और इसका मुझे अफसोस है।”
हालांकि जयसूर्या पद छोड़ रहे हैं, लेकिन उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि वह तुरंत ऐसा करेंगे। श्रीलंका का अफग़ानिस्तान के ख़िलाफ एक लिमिटेड-ओवर्स दौरा 13 मार्च से शुरू होना था (हालांकि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण उस सीरीज पर अब खतरा मंडरा रहा है), और संभव है कि बोर्ड चाहेगा कि वह उस दौरे तक टीम के साथ बने रहें।
उन्होंने कहा, “मेरा कॉन्ट्रैक्ट जून तक है। मैंने अभी तक आधिकारिक तौर पर एसएलसी को कोई जानकारी नहीं दी है। उन्हें यह भी नहीं पता कि मैं यह बात कहने वाला हूं। मुझे जाकर उनसे चर्चा करनी होगी। अगर वे किसी और को (टीम का कोच) ला सकते हैं, तो निश्चित रूप से उन्हें ऐसा करना चाहिए।”
जयसूर्या ने 2024 टी20 विश्व कप के तुरंत बाद श्रीलंका के हेड कोच की ज़िम्मेदारी संभाली थी। उनकी कई अहम उपलब्धियां उनके शुरुआती महीनों में ही आईं। अगस्त 2024 में श्रीलंका ने 27 साल बाद भारत के ख़िलाफ अपनी पहली द्विपक्षीय वनडे सीरीज़ जीती। इसके बाद उसी साल सितंबर में द ओवल में एक टेस्ट मैच जीता और फिर घरेलू टेस्ट सीरीज में न्यूज़ीलैंड को 2-0 से हराया।
“पिछले डेढ़ साल में मैं टीम को उस स्थिति से यहां तक लेकर आया, जहां हम पहले थे। वनडे में हमारी रैंकिंग आठवें या नौवें स्थान पर थी और हम चैंपियंस ट्रॉफ़ी के लिए क्वालिफ़ाई भी नहीं कर पाए थे। लेकिन मैं टीम को नंबर 4 तक ले आया। टेस्ट टीम को मैंने नंबर 6 तक पहुंचाया, और टी20 टीम भी छठे या सातवें स्थान पर है (फ़िलहाल वह आठवें नंबर पर है)।
“यह सब मैंने अकेले नहीं किया। मेरे सपोर्ट स्टाफ ने मुझे जबरदस्त सहयोग दिया। पहले दिन से ही मैंने उनसे मदद मांगी थी, क्योंकि कोच के तौर पर मेरे पास बहुत ज़्यादा अनुभव नहीं था। लेकिन अपने क्रिकेट अनुभव की वजह से मैं इसे मैनेज कर पाया।”
जयसूर्या के कार्यकाल का आख़िरी साल सबसे छोटे फ़ॉर्मेट में नाकामियों से भरा रहा। घरेलू टी 20 विश्व कप में लगातार चार हार के साथ टूर्नामेंट से बाहर होना इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। इसके अलावा 2025 एशिया कप में भी श्रीलंका का प्रदर्शन साधारण रहा, और पिछले साल पाकिस्तान में हुई टी20 त्रिकोणीय सीरीज में भी टीम उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाई।
कोच बनने से पहले जयसूर्या दो अलग-अलग कार्यकाल में श्रीलंका के चीफ़ सेलेक्टर की भूमिका भी निभा चुके हैं।
