
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस डीडी बंसल की एकलपीठ ने सिंधी धर्मशाला ओमती जबलपुर स्थिति एक दुकान के विवाद में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया। जिसके तहत साफ किया गया कि यदि किरायेदार ने 31 अगस्त 2026 या उससे पूर्व किराये की दुकान खाली नहीं की तो प्रतिदिन पांच सौ रुपये का जुर्माना अदा करना होगा। साथ ही इस रवैये को अदालत की अवमानना भी माना जाएगा।
दरअसल मामले की सुनवाई के दौरान अनावेदक जबलपुर निवासी सुभान बी व अन्य की ओर से अधिवक्ता केके पांडे सहित अन्य ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि अनावेदक सुभान बी सहित अन्य ने सैयद वाहिद अली को दुकान किराये से दी थी। पहले तो नियमित किराया दिया गया, लेकिन बाद में दुकान कब्जाने जैसा रवैया अपनाते हुए किराया रोका जाने लगा, इसलिए मामला अदालत पहुंचा। न्यायालय ने सुनवाई के बाद अपने आदेश में साफ किया कि दुकान खाली करने 31 अगस्त 2026 तक की मोहलत दी जाती है। इस बीच किरायेदार नियमित किराया अदा करेंगे। अदालत द्वारा लगाए गए सभी ड्यूज अगर कोई हों, तो उन्हें भी 30 दिनों के अंदर चुका देंगे, जिसमें लिटिगेशन का खर्च भी शामिल है, अगर कोई हो। किरायेदार किराये की जगह किसी को नहीं देंगे और उसका नेचर नहीं बदलेंगे। किरायेदार तीन हफ्ते के अंदर एग्जीक्यूटिंग कोर्ट के सामने ऊपर बताई गई शर्तों के बारे में एक अंडरटेकिंग देंगे। अगर अपील करने वाले किरायेदार ऊपर बताई गई किसी भी शर्त को मानने में नाकाम रहते हैं, तो मकान मालिक तुरंत डिक्री को एग्जीक्यूट करने के लिए आजाद होंगे।
