बारामती में विमान हादसे की शुरुआती रिपोर्ट में दृश्यता कम होने की पुष्टि

नयी दिल्ली, 28 फरवरी (वार्ता) महाराष्ट्र के बारामती में 28 जनवरी 2026 को हुए विमान हादसे कि प्राथमिक जांच रिपोर्ट में दुर्घटना के समय दृश्यता न्यूनतम सीमा से कम होने और हवाई पट्टी तथा रनवे के रखरखाव में कमी की बात का खुलासा हुआ है।

इस हादसे में महाराष्ट्र के तत्कालीन उपमुख्यमंत्री अजित पवार समेत विमान में सवार सभी पांच लोगों की मौत हो गयी थी। जांच में पता चला है कि विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से ठीक पहले पायलट ने कहा था – “उफ, उफ”।

वीएसआर वेंचर्स का लीयरजेट 45 एक्सआर विमान (पंजीकरण संख्या वीटी-एसएसके) मुंबई से श्री पवार को लेकर बारामती पहुंचा था। वहां उतरते समय रनवे 11 की बाईं तरफ विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया था और उसमें आग लग गयी थी। श्री पवार के साथ उनके निजी सुरक्षा अधिकारी, दोनों पायलट और एक केबिन अटेंडेंट की जलकर मौत हो गयी थी।

रिपोर्ट में बताया गया है कि बारामती हवाई पट्टी पर सिर्फ वीएफआर (वीजुअल फ्लाइट रूल्स) के तहत परिचालन की अनुमति है जिसके लिए न्यूनतम दृश्यता पांच किलोमीटर होनी चाहिए। पायलट और एटीसी के बीच हुए संचार से पता चलता है कि उस समय दृश्यता तीन किमी थी जिसके बारे में एटीसी ने पायलट को सूचना दी थी। उपग्रह से प्राप्त तस्वीरों के माध्यम से बताया गया है कि उस समय पुणे के आसपास बादल नहीं था, लेकिन 81 किलोमीटर दूर स्थित बारामती में हल्का कोहरा था।

इसके अलावा हवाई पट्टी के रखरखाव और वहां मौजूद इंतजामों में खामियों का भी पता चला है। रिपोर्ट में बताया गया है कि रनवे की आखिरी बार री-कार्पेटिंग करीब 10 साल पहले मार्च 2016 में की गयी थी। रनवे पर मौजूद मार्किंग धूमिल हो चुकी थी और रनवे की सतह से छोटे-छोटे कंकड़ निकल आये थे।

साथ ही वहां स्थायी तौर पर एंबुलेंस या अग्निशमन की सुविधा भी नहीं थी। किसी चार्टर्ड विमान द्वारा अनुरोध किये जाने पर हवाई पट्टी के अनुरोध पर बारामती नगर निगम द्वारा उनका प्रबंध किया जाता है।

इस हवाई पट्टी की कोई चाहरदीवारी भी नहीं और फेंसिंग अपर्याप्त है।

एएआईबी ने बताया है कि सॉलिड स्टेट फ्लाइट डाटा रिकॉर्डर से डाटा डाउनलोड कर लिया गया है। सॉलिड स्टेट कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर का डाटा अमेरिका के नेशनल ट्रांसपोर्ट सेफ्टी बोर्ड की मदद से डाउनलोड किया जायेगा।

जांच एजेंसी ने पायलट और एटीसी के बीच हुए संचार की भी जानकारी दी है। इससे पता चलता है कि विमान में सुबह 8.19 बजे बारामती एटीसी से पहली बार संपर्क किया था। उस समय उसने बताया था कि वह हवाई पट्टी से 30 मील की दूरी पर है। अगला संवाद 8.27 बजे हुआ जब विमान 10 मील दूर था। एटीसी ने रनवे 11 पर उतरने के लिए कहा था लेकिन पायलट ने रनवे 29 (रनवे के दूसरे छोर) के लिए अनुरोध किया जिसे एटीसी ने स्वीकार कर लिया। हालांकि दो मिनट बाद ही पायलट ने फिर रनवे 11 पर उतरने की अनुमति मांगी जिसे एक बार फिर स्वीकार कर लिया गया। उसी समय एटीसी ने बताया था कि दृश्यता तीन किमी है। हालांकि पहली बार में पायलट ने विमान को उतारने की बजाय एक और चक्कर लगाने का फैसला किया।

दूसरे प्रयास में पायलट ने 8.40 बजे रनवे 11 पर उतरने की अनुमति मांगी। लेकिन उतरते समय हादसा हो गया। एटीसी ने आठ बजकर 44 मिनट 13 सेकेंड पर विमान से आखिरी आवाज सुनी – “उफ, उफ”।

हादसे की जांच अभी जारी है और अंतिम रिपोर्ट बाद में आयेगी। इस बीच एएआईबी ने कुछ अनुशंसाएं की हैं। इनमें कहा गया है कि डीजीसीए सभी वीएफआर उड़ानों के ऑपरेटरों से अनियंत्रित हवाई पट्टियों पर परिचालन के दौरान मानक परिचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) का सख्ती से पालन करने की हिदायत दे। साथ ही इन हवाई पट्टियों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश देने के लिए कहा गया है कि मौसम संबंधी मानदंडों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करायें और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन करें।

एएआईबी ने अनियंत्रित हवाई पट्टियों पर मौसम तथा परिचालन संबंधी सुविधाएं बढ़ाने की भी अनुशंसा की है।

 

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