इंदौर: बीआरटीएस सड़क को लेकर आज हाईकोर्ट ने फिर कड़ी टिप्पणी की और कहा कि एक विभाग से दूसरे विभाग पर ढोल कर निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है. नगर निगम ठेकेदार और अधिकारियों को हाईकोर्ट ने जुर्माना लगाने की चेतावनी दी है.बीआरटीएस सड़क को लेकर आज हाईकोर्ट की डबल बेंच में वरिष्ठ अधिवक्ता अजय बागड़िया द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई हुई. जस्टिस अजय कुमार शुक्ला और आलोक अवस्थी की कोर्ट में सुनवाई के दौरान आज पीडब्ल्यूडी के ब्रिज सेल के मुख्य अभियंता ने बीआरटीएस सड़क की एक तरफ की रैलिंग हटाने से मना किया और तर्क दिया कि पीडब्ल्यूडी एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण करेगा तो एक तरफ की रैलिंग सुरक्षा के लिए जरूरी है.
एलआईजी से नवलखा तक 6 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर निर्माण किया जाना है. इस बात पर अधिवक्ता अजय बागड़िया ने आपत्ति ली और कहा कि 2019 से एलिवेटेड कॉरिडोर की बात की जा रही है, आज तक काम शुरू नही हुआ है. हाईकोर्ट के निर्देश से बचने के लिए एलिवेटेड कॉरिडोर को ले आए, अधिकारी बहाने बना रहे हैं. जस्टिस शुक्ला और अवस्थी ने कहा कि हाईकोर्ट के निर्देश का पालन करने की बजाय एक विभाग से दूसरे विभाग पर बात ढोल रहे है.
अदालत ने बीआरटीएस तोड़ने के विषय में नगर निगम ठेकेदार को भी तलब किया. निगम ठेकेदार ने कहा कि मुझे नुकसान हो रहा है, मैं काम नहीं कर सकता. इस पर हाईकोर्ट जज द्वय ने तर्क से असहमत होकर कहा कि ऐसा नहीं होता है कि सार्वजनिक काम में टालमटोली करेंगे. जनता परेशान हो रही है. यातायात अवरुद्ध हो कर परेशानी का कारण बन गया है. अधिवक्ता बागड़िया ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि शहर को बलि का बकरा बना दिया है. सब अपनी असफलता को छुपा रहे हैं। एक साल हो गया है बीआरटीएस तोड़ने की घोषणा को.
अगली सुनवाई 28 जनवरी को
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि सरकार ने ही आदेश दिए थे बीआरटीएस तोड़ने के, उच्च न्यायालय ने नहीं. सरकार स्वयं अपनी कारवाई नहीं कर रही है. जस्टिस शुक्ला ने कहा कि अधिकारियों और ठेकेदार पर जुर्माना लगाया जा सकता है. न्यायालय में अगली सुनवाई 28 जनवरी को होगी. आज हाईकोर्ट में कलेक्टर शिवम वर्मा, नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल, यातायात डीसीपी आनंद कलादगी, पीडब्ल्यूडी मुख्य अभियंता पुल प्रकोष्ठ पीसी वर्मा मौजूद थे
