हेल्थ सेक्टर में भारत की करीब 80 फीसदी निर्भरता आयातित मेडिकल डिवाइसेज पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि बजट में ‘बाय इंडिया’ पहल को मजबूत किया जाना चाहिए।
आगामी 1 फरवरी 2026 को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर देश का हेल्थकेयर और फार्मास्यूटिकल सेक्टर खासा उम्मीदों से भरा हुआ है। बजट पेश होने में अब ज्यादा दिन नहीं बचे हैं और ऐसे में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ सरकार से ज्यादा सार्वजनिक खर्च, जीएसटी ढांचे में सुधार और डिजिटल हेल्थ व रिसर्च को मजबूत करने की मांग कर रहे हैं। उद्योग जगत का मानना है कि बजट 2026 भारत के हेल्थ सिस्टम को नई दिशा देने वाला साबित हो सकता है।
हेल्थ सेक्टर के जानकारों का कहना है कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच सुधारने के लिए सरकारी खर्च को जीडीपी के 3 से 5 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना चाहिए। फिलहाल यह खर्च सीमित है, जबकि गैर-संचारी रोगों (एनसीडी) का बोझ लगातार बढ़ रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, भारत में करीब 65 फीसदी मौतें एनसीडी के कारण होती हैं, जिससे हेल्थ सिस्टम पर दबाव बढ़ गया है।
