गुलमर्ग (जम्मू और कश्मीर), 28 फरवरी (वार्ता) गुलमर्ग के बर्फीले ढलानों पर 23 से 26 फरवरी के बीच ‘खेलो इंडिया विंटर गेम्स’ के छठे संस्करण में एक ओर जहां अनुभवी खिलाड़ी अपनी पुरानी चमक बिखेर रहे थे, वहीं दूसरी ओर कुछ ऐसा घट रहा था जिसने सबका ध्यान खींचा। एक खामोश मगर जबरदस्त नई पीढ़ी विंटर स्पोर्ट्स के मंच पर अपनी दस्तक दे रही है। ये एथलीट उधार के स्की, दक्षिण भारतीय लहजे, अर्धसैनिक बल के जज्बे और कश्मीर की सफेद खामोशी में न समाने वाले बड़े सपने लेकर आए थे। जब तक झंडे नीचे उतारे गए, उन्होंने बर्फ पर ऐसे पदचिह्न छोड़ दिए थे जिन्हें कोई हिमपात नहीं मिटा सकता। अगर कोई ऐसा चेहरा था जिसे टैलेंट स्काउट्स (प्रतिभा खोजने वाले) बार-बार देख रहे थे, तो वह था 17 वर्षीय जिया आर्यन का। बेंगलुरु की रहने वाली जिया इस तरह स्कीइंग करती हैं जैसे वे ताड़ के पेड़ों के नीचे नहीं बल्कि आल्प्स की पहाड़ियों में पैदा हुई हों। अल्पाइन स्पर्धाओं में जिया ने दो कांस्य पदक (स्लालोम और जाइंट स्लालोम) जीते। उनका प्रदर्शन केवल पदकों के बारे में नहीं, बल्कि उनके आत्मविश्वास के बारे में था। उन्होंने रक्षात्मक होने के बजाय आक्रामक तरीके से कोर्स को पूरा किया।
सीआरपीएफ की एथलीट रेनू दानू ने महज दो साल पहले पहली बार बर्फ देखी थी, लेकिन इस हफ्ते वे तीन बार पोडियम पर खड़ी हुईं। रेनू ने नॉर्डिक 15-किमी, नॉर्डिक 1.5-किमी स्प्रिंट और स्की माउंटेनियरिंग रिले में तीन रजत पदक अपने नाम किए। इसके बाद महाराष्ट्र की एथलीट 19 वर्षीय काम्या कार्तिकेयन का नंबर आया, जिन्होंने एक ऐसा पल रचा जिसकी गूंज उनकी अपनी जीत के जश्न से कहीं आगे तक सुनाई दी। उन्होंने ‘स्की माउंटेनियरिंग’ में स्वर्ण पदक जीतकर खेलो इंडिया विंटर गेम्स में अपने राज्य के लिए इस स्पर्धा में एक ऐतिहासिक पहली जीत दर्ज की। मेघालय की 25 वर्षीय काजल कुमारी राय (सीआरपीएफ) ने नॉर्डिक ट्रैक्स को अपनी व्यक्तिगत प्रतिभा के प्रदर्शन का मंच बना दिया। उन्होंने महिलाओं की 15 किमी और 10 किमी स्प्रिंट स्पर्धाओं में दो स्वर्ण पदक जीतकर अपनी शक्ति और सधी हुई रफ्तार का लोहा मनवाया और ‘नॉर्डिक डबल’ का खिताब अपने नाम किया।हिमाचल प्रदेश की 29 वर्षीय दिग्गज आंचल ठाकुर ने अपनी सफलता की कहानी में एक नया अध्याय जोड़ा। उन्होंने अल्पाइन स्कीइंग के जाइंट स्लालोम में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता। मेजबान क्षेत्र के लिए, ज़ुबैर अहमद लोन ने स्नोबोर्डिंग जाइंट स्लालोम में शीर्ष स्थान हासिल कर जम्मू-कश्मीर को इस संस्करण का एकमात्र स्वर्ण पदक दिलाया। इन चार दिनों ने गुलमर्ग में एक नई इबारत लिखी, जहां बेंगलुरु की नई पीढ़ी और बर्फ से अनजान रहे जांबाज सैनिक एक साथ रेस में उतरे। जब मेघालय, महाराष्ट्र और कश्मीर के खिलाड़ी एक साथ पदक लेने आए, तो यह देश की विविधता और एकता का प्रतीक बन गया। अब तैयारी केवल हौसले तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें पेशेवर विशेषज्ञों का वैज्ञानिक आधार जुड़ गया है।

