नयी दिल्ली, 27 फरवरी (वार्ता) वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 7.8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सरकार द्वारा शुक्रवार को जारी आंकड़ों में बताया गया है कि तीसरी तिमाही में जीडीपी 84.54 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है जबकि पिछले वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में जीडीपी 78.41 लाख करोड़ रुपये रहा था। ये आंकड़े नये आधार वर्ष 2022-23 की सीरीज पर आधारित हैं। नयी सीरीज पर आधारित जीडीपी का यह पहला आंकड़ा है। इसके अनुसार, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत और दूसरी तिमाही में 8.4 प्रतिशत रही है। इस वृद्धि में विनिर्माण क्षेत्र का मुख्य योगदान है। आंकड़ों के अनुसार, तीसरी तिमाही में विनिर्माण की वृद्धि दर 13.3 प्रतिशत रही। इसके अलावा सेवा क्षेत्र की वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत दर्ज की गयी। वहीं कृषि क्षेत्र में 1.4 प्रतिशत की दो साल की सबसे सुस्त वृद्धि देखी गयी। इस दौरान सरकारी उपभोग व्यय सालाना आधार पर 4.7 प्रतिशत और निजी उपभोग व्यय 8.7 प्रतिशत बढ़ा है। साथ ही सकल पूंजी निर्माण 7.8 प्रतिशत बढ़ गया।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने नयी सीरीज के आधार पर वित्त वर्ष 2025-26 के लिए दूसरा अग्रिम अनुमान जारी किया है। पूरे वित्त वर्ष में जीडीपी के 322.58 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान जताया गया है जो 2024-25 के 299.89 लाख करोड़ की तुलना में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पुरानी सीरीज पर जनवरी में जारी पहले अग्रिम अनुमान में 2025-26 में जीडीपी वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने की बात कही गयी थी। नयी सीरीज के हिसाब से वित्त वर्ष 2023-24 में वास्तविक जीडीपी 7.2 प्रतिशत और 2024-25 में 7.1 प्रतिशत बढ़ा था। वित्त वर्ष में विनिर्माण क्षेत्र में 11.5 प्रतिशत और सेवा क्षेत्र में नौ प्रतिशत की दर से वृद्धि का अनुमान लगाया गया है। कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर का अनुमान 2.4 प्रतिशत है। पूरे वित्त वर्ष में सरकारी उपभोग व्यय 6.6 प्रतिशत और निजी उपभोग व्यय 7.7 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। वहीं, पूंजी निर्माण में 7.1 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान है।

