इंदौर: शहर की जनता पर नगर निगम द्वारा अतिरिक्त संपत्तिकर वसूली का बोझ बढ़ा दिया है. शहर में अब नगर निगम द्वारा संपत्ति कर में एमओएस का भी टैक्स देना होगा. नगर निगम ने इसके लिए सभी संपत्तिकर खातों में एमओएस की राशि जोड़कर वसूली शुरू कर दी है. एमओएस का मतलब यह है कि प्लाट के खुले हिस्से का भी नगर निगम द्वारा टैक्स लिया जाएगा. इससे नगर निगम को 4 सौ करोड़ रुपए राजस्व की अतिरिक्त वसूली होने की संभावना है.
नगर निगम द्वारा शहर के करीब 5.25 लाख संपत्ति कर खातों में एमओएस (मार्जिनल ओपन स्पेस) को जोड़कर संपत्ति कर बिल जारी किए. इससे नगर निगम को 4 सौ करोड़ रुपए अतिरिक्त कर के रूप में मिलने की संभावना है. उक्त अतिरिक्त राशि के वसूली के लिए सभी झोन के सहायक राजस्व अधिकारी और बिल कलेक्टर को सक्रिय किया है, बल्कि वसूली का लक्ष्य भी दे दिया है. निगम का समस्त राजस्व विभाग शहर में वसूली के लिए निकल पड़ा है.
नगर निगम ने उक्त एमओएस को टैक्स में शामिल करने का निर्णय राज्य सरकार के अधिनियम में बदलाव के तहत लिया है. राज्य सरकार ने संपत्तिकर की गणना में एमओएस की छूट का प्रावधान खत्म कर दिया है. अब सिर्फ कृषि भूमि की टैक्स में गणना नहीं की जाएगी. बताया जा रहा है कि पहले बड़ी बड़ी संपत्तियों को टारगेट किया है. उसके बाद छोटे प्लॉट और मकान मालिकों से राशि वसूली जाएगी. हालांकि सभी संपत्ति करदाताओं के खाते में एमओएस की राशि जोड़ दी गई है. मतलब यह है कि इस बार शहर की जनता को एमओएस को लेकर लागू किए गए नए प्रावधान अनुसार संपत्ति कर देना होगा.
2020 में कर दिया था संशोधन
नगर निगम राजस्व प्रभारी निरंजन सिंह चौहान ने कहा कि सरकार ने 2020 में ही नगर निगम अधिनियम में संशोधन कर दिया था. अब सरकार ने सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए है, इसलिए एमओएस की गणना संपत्तिकर में की जा रही है.
क्या है एमओएस
एमओएस, जिसको मार्जिनल ओपन स्पेस कहते है, प्लॉट का वह खुला हिस्सा जिस पर कोई निर्माण नहीं किया जाता है. नगर निगम भवन निर्माण में उक्त हिस्से को खुला रखने का नियम है. मुख रूप से एमओएस पूरे प्लॉट की साइज अनुसार सामने, पीछे और साइड में छोड़ा जाता है. कहते है कि एमओएस नहीं छोड़ने या कवर कारण को नगर निगम द्वारा अतिक्रमण भी माना जाता है.
एमओएस का संपत्तिकर जमा करने से अतिक्रमण की छूट नहीं
नगर निगम में पूरे एमओएस का संपत्ति कर जमा करने का मतलब यह नहीं है कि प्लॉट के खुले हिस्से पर निर्माण कर सकते है, वो भवन निर्माण नियम के तहत अवैध और अतिक्रमण की श्रेणी में ही गिना जाएगा.
ऐसे होगी गणना
एमओएस की गणना बहुमंजिला इमारतों में प्लॉट की साइज अनुसार सभी फ्लैट मालिकों में बराबर हिस्सा बांटकर संपत्ति कर को गणना होगी. ऐसी तरह कमर्शियल उपयोग के भवनों, मॉल और अन्य जगहों पर भी प्लॉट साइज के अनुसार दुकानदारों और ऑफिस वालो में एमओएस को बराबर बांटकर वसूली की जाएगी.
