नयी दिल्ली/ईटानगर, 25 फरवरी (वार्ता) केंद्रीय संचार तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास (डीओएनईआर) मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बुधवार को ‘अष्टलक्ष्मी दर्शन’ युवा विनिमय कार्यक्रम के 12वें बैच के छात्रों से वर्चुअल संवाद किया।
यह कार्यक्रम 18 फरवरी से 3 मार्च तक अरुणाचल प्रदेश के राजीव गांधी विश्वविद्यालय में आयोजित किया जा रहा है। इस दौरान डीओएनईआर मंत्रालय और उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
डीओएनईआर मंत्रालय द्वारा संचालित ‘अष्टलक्ष्मी दर्शन’ प्रमुख युवा कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों के युवाओं के बीच आपसी समझ बढ़ाना और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करना है। लगभग 14 दिनों के कार्यक्रम में शैक्षणिक सत्र, सांस्कृतिक आदान-प्रदान, विरासत स्थलों का भ्रमण और स्थानीय समुदायों से संवाद शामिल है।
सरकार की योजना के अनुसार 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 1,280 छात्र 32 बैचों में पूर्वोत्तर के सभी आठ राज्यों—अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम—का अनुभव प्राप्त करेंगे। 12वें बैच में झारखंड और पुडुचेरी से 20-20 छात्र भाग ले रहे हैं, जबकि अब तक 471 छात्र कार्यक्रम में शामिल हो चुके हैं। इस कार्यक्रम में लड़के-लड़कियों की समान भागीदारी के माध्यम से युवाओं के सशक्तिकरण और समावेशिता पर भी विशेष जोर दिया गया है।
श्री सिंधिया ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना को साकार करता है। उन्होंने पूर्वोत्तर के आठ राज्यों को “अष्टलक्ष्मी” बताते हुए कहा कि यहां की भाषाओं, परंपराओं और विकास संभावनाओं को समझना देश की एकता के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऐसे आदान-प्रदान कार्यक्रम विविधता में एकता को मजबूत करते हैं और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को आगे बढ़ाते हैं।
श्री सिंधिया ने बताया कि छात्र अपनी यात्रा के दौरान अरुणाचल प्रदेश के राज्य स्थापना दिवस समारोह में शामिल हुए, ईटा किला और गंगा झील का भ्रमण किया तथा राजभवन में संवाद कार्यक्रम में भाग लिया। इससे उन्हें शासन व्यवस्था, संवैधानिक संस्थाओं और जनजातीय सांस्कृतिक विरासत को करीब से समझने का अवसर मिला।
उन्होंने पूर्वोत्तर में पर्यटन की अपार संभावनाओं का भी उल्लेख किया और कहा कि विशेषकर अरुणाचल प्रदेश में पर्यटन रोजगार सृजन और आर्थिक विकास का बड़ा माध्यम बन सकता है।
श्री सिंधिया से संवाद के दौरान छात्रों ने अपने अनुभव भी साझा किए। झारखंड के बीटेक छात्र मलय श्रीवास्तव ने कार्यक्रम को बेहतरीन अवसर बताते हुए अरुणाचल प्रदेश की पर्यावरण जागरूकता और सामुदायिक संस्कृति की सराहना की। पुडुचेरी विश्वविद्यालय की श्रद्धांजलि मोहापात्रा ने क्षेत्र की शांति और स्थानीय लोगों से जुड़ने के अनुभव को महत्वपूर्ण बताया। झारखंड की अनीमा कुमारी ने सांस्कृतिक एकता की संभावनाओं पर जोर दिया, जबकि पुडुचेरी की मुमताजन तहमीना ने उगते सूरज की भूमि के सूर्योदय की सुंदरता की प्रशंसा की। रुचिका कुमारी ने राज्य के लोगों के अनुशासन और हरियाली को सराहा।
श्री सिंधिया ने छात्रों से अपने अनुभव परिवार और समाज के साथ साझा करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप यह कार्यक्रम युवाओं को पूर्वोत्तर भारत की वास्तविक संस्कृति, परंपरा और लोगों से परिचित कर उन्हें राष्ट्रीय एकता का दूत बनाता है।
‘अष्टलक्ष्मी दर्शन’ कार्यक्रम सांस्कृतिक एकीकरण, युवा सहभागिता और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है तथा समावेशी और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य की ओर एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
