
सीहोर/आष्टा। जिले की आष्टा तहसील के ग्राम मैना और खामखेड़ा गांवों के बीच डेरा डाले पशुपालकों के लिए मंगलवार का दिन भारी पड़ गया. हल्दी का घोल पिलाने के कुछ ही समय बाद भेड़-बकरियां तड़पने लगीं. जब तक उनको उपचार मिल पाता तब तक लगभग 80 भेड़ों की मौत हो गई. गर्मी प्रारंभ होते ही राजस्थान के पशु पालक अपने पशुओं को लेकर प्रदेश में आ जाते हैं. ऐसे ही कुछ पशुपालकों ने तहसील के ग्राम मैना और खामखेड़ा के बीच मैदान में डेरा डाल रखा है. बताया जाता है कि पशुपालकों ने ग्राम मैना के साप्ताहिक बाजार से पिसी हुई हल्दी खरीदी थी. बीमारियों से दूर रखने के उद्देश्य से हल्दी को पानी में घोलकर भेड़-बकरियों को पिलाया गया. बताया जा रहा है कि घोल पिलाने के कुछ ही देर बाद पशुओं में असामान्य लक्षण दिखाई देने लगे. पहले उल्टी शुरू हुई, फिर अत्यधिक कमजोरी के कारण वे खड़े नहीं हो पा रहे थे और एक-एक कर जमीन पर गिरने लगे. स्थिति इतनी तेजी से बिगड़ी कि कुछ ही समय में पशु अचेत हो गए. पशुपालकों ने स्थानीय स्तर पर उपचार के प्रयास किए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी. लगभग 80 पशुओं ने दम तोड़ दिया था. सभी पशुओं का पीएम कराने के बाद उन्हें गड्डे में दफना दिया गया है.
पशुपालकों का कहना, मिलावटी थी हल्दी
घटना के बाद पशुपालकों ने आशंका जताई है कि बाजार से खरीदी गई हल्दी मिलावटी हो सकती है या उसमें कोई जहरीला रसायन मिला हो सकता है. ग्रामीणों का कहना है कि हल्दी वर्षों से पशुओं को दी जाती रही है, लेकिन इस तरह की सामूहिक मौत की घटना पहले कभी सामने नहीं आई। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि हल्दी के नमूने की जांच कराई जाए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए.
