अनंत समाधि में ‘कृपा निधान’ षोडशी महापर्व पर आस्था का सैलाब

सतना: परमहंस आश्रम धारकुंडी में मंगलवार को ब्रह्मलीन सद्गुरुदेव स्वामी सच्चिदानंद महाराज की समाधि पूजा एवं षोडशी कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जहां लाखों भक्तों ने अपने पूज्य गुरुदेव के प्रति अटूट श्रद्धा व्यक्त की। भगवत् स्वरूप सद्गुरुदेव, जो अब अनंत समाधि में लीन हो चुके हैं उनकीकी कृपा से ओतप्रोत इस महापर्व में भक्तों ने समाधि पर आस्था के पुष्प अर्पित किए और विशाल भंडारे का महाप्रसाद ग्रहण किया। आश्रम की पवित्र भूमि पर भक्ति का ऐसा रस बरसा कि हर तरफ जय गुरुदेव के कीर्तन की ध्वनि गूंज रही थी, जो 7 फरवरी से निरंतर जारी है।
सुबह से रात तक चला भंडारा
धारकुंडी आश्रम, जो अपने कड़े अनुशासन के लिए विख्यात है। यहांं पहली बार भक्तों की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए प्रबंधन ने सुबह 8 बजे से ही भंडारे की पंगतें लगवा दीं, जो देर रात तक अनवरत चलती रहीं। इस अनुपम व्यवस्था से भक्तों को किसी असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा। लाखों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने समाधि दर्शन कर अपने हृदय की भावनाएं अर्पित कीं और भंडारे के महाप्रसाद से तृप्त होकर गुरुदेव की कृपा का अनुभव किया। पुलिस प्रशासन के लिए इतनी विशाल भीड़ को नियंत्रित करना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन विभिन्न स्थलों पर वाहन पार्किंग, प्रवेश और निकास की उत्कृष्ट व्यवस्था से सब कुछ सुचारू रूप से संपन्न हुआ।
संतों की विधिवत विदाई , चित्रकूट से युवराज स्वामी का आगमन
षोडशी महापर्व के अवसर पर विभिन्न गुरु आश्रमों से पधारे पूज्य संतों की विधिवत विदाई की गई, जिसने कार्यक्रम को और अधिक दिव्य बना दिया। चित्रकूट से पधारे युवराज स्वामी ने भी धारकुंडी पहुंचकर समाधि दर्शन किए और भक्ति की इस महासभा में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सद्गुरुधाम धारकुंडी में भक्ति का ऐसा उल्लास छाया कि भक्तजन गुरुदेव की स्मृति में पूरी तरह डूब गए। यह दृश्य देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो स्वयं भगवान की कृपा यहां वर्षा हो रही हो।
जब पहुंचे स्वामी आडग़ड़ानंद महाराज ,भक्तों में उमंग की लहर
दोपहर करीब 12:45 बजे जब पूज्य परमहंस सद्गुरुदेव स्वामी आडग़ड़ानंद महाराज का हेलीकॉप्टर आकाश में दिखाई दिया, तो भक्तों में उल्लास की लहर दौड़ गई। हजारों श्रद्धालु उनकी एक झलक पाने के लिए पागलों की तरह दौड़े। भारी भीड़ के बीच स्वामीजी समाधि स्थल पहुंचे और पूरे वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजन संपन्न किया। उनकी दिव्य उपस्थिति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और भक्तजन उनकी अमृतवाणी सुनने के लिए उत्सुकता से प्रतीक्षा करते रहे। बाद में स्वामीजी के श्रीमुख से अमृतवाणी का श्रवण प्राप्त कर भक्तों के हृदय आनंद से भर उठे। यह महापर्व न केवल सद्गुरुदेव की अनंत समाधि की स्मृति में एक आस्था की पुष्पांजलि था, बल्कि भक्ति के उस अमर रस का साक्षात्कार भी जो धारकुंडी आश्रम को सदैव जीवंत रखता है।
अनुशासित और सुव्यस्थित आयोजन ने किया भक्तों को विभोर
आयोजन की व्यवस्थाएं सुव्यवस्थित रहीं। परमहंस आश्रम के पूज्य संत रामामयण महराज, वीरेंद्र महराज, विजय बाबा, भाऊ बाबा,संजय बाबा, राजकरण बाबा, गंगा बाबा, छोटे बाबा, बद्री बाबा, कमलेंद्र महराज और श्रीराम बाबा सहित समस्त संत एवं सेवकगण सेवा में तत्पर रहे। सुरक्षा की दृष्टि से आसपास के थानों का पुलिस बल भी तैनात रहा, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्वक संपन्न हुआ।
संतों ने ‘गुरूदेव’ को बताया चेतना का प्रतीक
अपने प्रवचनों में संतों ने कहा कि गुरु केवल देह नहीं, बल्कि वह चेतना हैं जो साधक के जीवन को दिशा देती है। महाराष्ट्र के पुणे और मुंबई, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ सहित अनेक राज्यों से आए श्रद्धालुओं ने इस आयोजन को गुरु-भक्ति, सेवा और समर्पण की जीवंत अभिव्यक्ति बताया। लवलेश बाबा ने कहा कि षोडशी पर्व गुरु के तप, त्याग और करुणा को स्मरण कर आत्मचिंतन का अवसर प्रदान करता है। दिनभर भजन-कीर्तन, सत्संग और गुरु-वंदना का क्रम चलता रहा, जिससे विंध्य की वादियां भी भक्ति-रस में सराबोर प्रतीत हुईं

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