सीहोर/आष्टा। स्थानीय प्रशासन ने जिले के जावर तहसील के ग्राम डोडी में चल रही एक अवैध फैक्ट्री पर छापा मारकर उस गंदे खेल का पर्दाफाश किया है, जिसमें लालच ने इंसानियत को पूरी तरह कुचल दिया.
प्रशासन द्वारा बीती रात की गई छापामार कार्रवाई के दौरान करीब 792 किलो नकली घी बरामद हुआ है. यह घी किसी डेयरी प्लांट में नहीं, बल्कि वनस्पति घी और संदिग्ध रसायनों को मिलाकर तैयार किया जा रहा था. ऊपर से पैकिंग ऐसी कि आम आदमी क्या, समझदार दुकानदार भी धोखा खा जाए. हूबहू सांची के रैपर, डिब्बे और ब्रांडिंग सब कुछ ऐसा कि असली और नकली में फर्क करना मुश्किल था. प्रशासन ने फैक्ट्री को सील कर दिया है और संचालक से लाइसेंस व फूड सेफ्टी से जुड़े दस्तावेज मांगे हैं. यदि दस्तावेज वैध नहीं पाए गए, तो आरोपी के खिलाफ धोखाधड़ी और खाद्य अपमिश्रण अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. लेकिन सवाल यह है क्या सिर्फ फैक्ट्री सील कर देने से बात खत्म हो जाएगी? बाजार में जो दुकानदार इस खेल का हिस्सा बने, क्या उन पर भी शिकंजा कसेगा? और सबसे अहम, जिन लोगों की थाली में यह मिलावटी घी पहुंच चुका है, उनकी सेहत की जिम्मेदारी कौन लेगा?
नकली घी की फैक्ट्री का पर्दाफाश होने के बाद लोगों में आक्रोश बना हुआ है. उनका कहना है कि भरोसे के नाम पर धोखा देने वाले आरोपियों को सख्त से सख्त सजा मिले.
किराए के मकान में मौत की फैक्ट्री
यह काला कारोबार जावर तहसील के डोडी गांव में एक किराए के मकान में धड़ल्ले से चल रहा था. कार्रवाई का नेतृत्व जावर तहसीलदार ओमप्रकाश चोरमा और खाद्य निरीक्षक कीर्ति मालवीय ने किया. जैसे ही टीम मौके पर पहुंची, फैक्ट्री संचालक गौरव वर्मा फरार हो गया जो खुद उसकी करतूतों की गवाही दे रहा है. मकान डोडी निवासी मानसिंह सेंधव का बताया जा रहा है, जिसे आरोपी ने किराए पर ले रखा था.
अंदर का नजारा चौंकाने वाला था
प्रशासन की टीम जब नकली घी बनाने की फैक्ट्री के अंदर दाखिल हुई तो वहां का नजारा काफी चौंकाने वाला था. नकली घी से भरे डिब्बे, वनस्पति के टीन, फर्जी रैपर और पैकिंग सामग्री का जखीरा. साफ था कि यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं, बल्कि संगठित गिरोह की सुनियोजित साजिश थी. चौंकाने वाली बात यह है कि यह नकली घी सीहोर शहर सहित तहसील मुख्यालयों के बाजारों में बेचा जा रहा था. कुछ दुकानदारों ने नाम न छापने की शर्त पर स्वीकार किया कि भारी मांग और ज्यादा मुनाफे के लालच में कुछ लोग इस मिलावटी घी को असली बताकर बेच रहे थे. चंद रुपयों के लालच में लोगों की सेहत को दांव पर लगा दिया गया. सोचिए, जिस ब्रांड पर लोग आंख बंद कर भरोसा करते हैं, उसी नाम पर मिलावट का जहर परोसा जा रहा था. त्योहारों और शादी-ब्याह के मौसम में यह घी कितने घरों तक पहुंचा होगा, इसका अंदाजा लगाना भी डरावना है.
