तेहरान | ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के खिलाफ देश के भीतर असंतोष की ज्वाला एक बार फिर भड़क उठी है। सोमवार को तेहरान की प्रमुख यूनिवर्सिटीज में लगातार तीसरे दिन छात्रों, विशेषकर छात्राओं ने मोर्चा संभाला। शरीफ यूनिवर्सिटी और तेहरान यूनिवर्सिटी में छात्रों ने कैंटीन और परिसरों में इकट्ठा होकर सरकार विरोधी नारे लगाए। अल जहरा यूनिवर्सिटी, जो केवल छात्राओं के लिए है, में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए जहाँ प्रदर्शनकारियों ने निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में नारे लगाए और राजशाही की वापसी की मांग की। प्रदर्शनों के दौरान छात्रों और अर्धसैनिक बल ‘बसिज’ के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं।
यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहे हैं जब अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु समझौते को लेकर तनाव चरम पर है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाते हुए चेतावनी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो परिणाम गंभीर होंगे। ईरान के भीतर छात्रों ने “औरत, जिंदगी, आजादी” के नारों के साथ खामेनेई को सत्ता से हटाने की मांग तेज कर दी है। रिपोर्टों के अनुसार, बसिज बलों ने प्रदर्शनकारियों को दबाने की कोशिश की, लेकिन छात्र पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। यह आंदोलन दिखाता है कि पिछले हिंसक दमन के बावजूद युवा पीढ़ी का साहस कम नहीं हुआ है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ईरान इस समय दोतरफा संकट से जूझ रहा है। एक तरफ ट्रंप प्रशासन की सैन्य धमकियाँ और आर्थिक प्रतिबंध हैं, तो दूसरी तरफ घरेलू मोर्चे पर बढ़ता जन-विद्रोह। गुरुवार को जिनेवा में परमाणु वार्ता का अगला दौर होना है, जिस पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। ईरानी विदेश मंत्रालय ने किसी भी बाहरी हमले का ‘कठोर’ जवाब देने की बात कही है, लेकिन देश के भीतर यूनिवर्सिटी कैंपस से उठ रही बगावत की आवाजें खामेनेई प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं। अब देखना होगा कि ईरान सरकार इस आंतरिक विद्रोह और वैश्विक दबाव को कैसे संभालती है।

