हैदराबाद | आगामी 27 फरवरी को रिलीज होने वाली फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2’ ने सिनेमाघरों में आने से पहले ही देशव्यापी बहस छेड़ दी है। फिल्ममेकर अनुराग कश्यप और प्रकाश राज जैसी हस्तियों द्वारा ट्रेलर की आलोचना किए जाने के बाद नेशनल अवॉर्ड विजेता डायरेक्टर कामाख्या नारायण सिंह ने तीखा पलटवार किया है। उन्होंने फिल्म का बचाव करते हुए कहा कि वे एक डॉक्यूमेंट्री मेकर रहे हैं और गहन शोध के बाद ही फिल्में बनाते हैं। डायरेक्टर ने विरोधियों को चुनौती देते हुए यहाँ तक कह दिया कि यदि फिल्म में दिखाई गई कोई भी बात गलत साबित हुई, तो वे हमेशा के लिए फिल्म बनाना छोड़ देंगे।
फिल्म के समर्थन में 23 फरवरी को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई, जहाँ असली पीड़ित परिवारों को मीडिया के सामने लाया गया। इस दौरान हरियाणा के फरीदाबाद की एक पीड़िता की माँ अपने आंसू नहीं रोक सकीं। उन्होंने 2020 की एक दर्दनाक घटना साझा करते हुए बताया कि कैसे एकतरफा प्यार और धर्म परिवर्तन के दबाव के चलते उनकी होनहार बेटी की हत्या कर दी गई थी। माँ का आरोप है कि उनकी बेटी पर जबरन निकाह का दबाव डाला गया और जब उसने इनकार किया, तो उसे मौत के घाट उतार दिया गया। परिवार ने राजनीतिक रसूख के कारण न्याय में देरी होने का भी दावा किया।
फिल्म के प्रोड्यूसर विपुल शाह ने भी प्रोजेक्ट पर लग रहे ‘प्रोपगैंडा’ के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि फिल्म का उद्देश्य केरल राज्य को बदनाम करना नहीं, बल्कि उन मानवीय संवेदनाओं और सच्चाई को दिखाना है जिन्हें समाज अक्सर अनदेखा कर देता है। मेकर्स का कहना है कि यह फिल्म उन बेटियों की आवाज है जिन्होंने धर्मांतरण और कट्टरपंथ का दंश झेला है। जहाँ एक ओर फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर दो फाड़ नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर असली पीड़ितों के बयानों ने इस विवाद को एक नया मोड़ दे दिया है।

