भोपाल। दलित-आदिवासी समाज के सामाजिक, आर्थिक और संवैधानिक अधिकारों को लेकर भोपाल डिक्लेरेशन-2 के मसौदे पर आज राजधानी भोपाल में व्यापक मंथन किया गया। इस अवसर पर विभिन्न सामाजिक संगठनों, बुद्धिजीवियों और वरिष्ठ नेताओं ने एक मंच पर आकर 2002 के भोपाल डिक्लेरेशन की समीक्षा करते हुए नए दौर की चुनौतियों के अनुरूप दस्तावेज तैयार करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह, वरिष्ठ नेता फूल सिंह बरैया, पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा, आदिवासी-दलित संगठनों के प्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। वक्ताओं ने कहा कि मौजूदा समय में संविधान, आरक्षण, शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर गंभीर खतरे दिखाई दे रहे हैं, ऐसे में भोपाल डिक्लेरेशन-2 एक साझा संघर्ष का रोडमैप बनेगा।
दिग्विजय सिंह ने कहा कि महंगाई, बेरोजगारी और संवैधानिक संस्थाओं के कमजोर होने का सबसे अधिक असर अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग पर पड़ा है। उन्होंने कहा कि भोपाल डिक्लेरेशन-2 के माध्यम से इन वर्गों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाया जाएगा।
बैठक में यह भी स्वीकार किया गया कि भोपाल डिक्लेरेशन-1 को पूरी तरह लागू नहीं किया जा सका, जिससे कई उद्देश्य अधूरे रह गए। इसी अनुभव से सीख लेकर अब एक ठोस, व्यावहारिक और संघर्षोन्मुख दस्तावेज तैयार किया जाएगा।
आयोजकों ने बताया कि विभिन्न चरणों में सुझाव एकत्र कर भोपाल डिक्लेरेशन-2 का अंतिम प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिसे आने वाले समय में सार्वजनिक किया जाएगा।
