पोर्ट ब्लेयर | अंडमान के समंदर में मंगलवार सुबह एक बड़ा विमान हादसा टल गया, जब पोर्ट ब्लेयर से मायाबंदर जा रहा पवन हंस का एक हेलिकॉप्टर तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। सुबह करीब 9:30 बजे उड़ान भरने के कुछ ही समय बाद पायलट को इंजन में गंभीर खामी महसूस हुई। घनी आबादी वाले क्षेत्र या घने जंगलों में उतरने के बजाय, पायलट ने सूझबूझ का परिचय देते हुए हेलिकॉप्टर को अंडमान सागर की लहरों के बीच ‘क्रैश लैंडिंग’ कराने का जोखिम भरा फैसला लिया। पायलट के इस साहसिक निर्णय के कारण एक बड़ी अनहोनी होने से बच गई।
पवन हंस कंपनी के आधिकारिक प्रवक्ता के अनुसार, हेलिकॉप्टर में दो क्रू मेंबर्स और पांच यात्रियों सहित कुल सात लोग सवार थे। लैंडिंग के तुरंत बाद बचाव दल सक्रिय हो गया और सभी सातों लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। हालांकि, इस घटना में कुछ यात्रियों को मामूली चोटें आई हैं, लेकिन किसी की जान को कोई खतरा नहीं है। प्रत्यक्षदर्शियों और विशेषज्ञों ने पायलट की कुशलता की सराहना की है, जिन्होंने अत्यंत प्रतिकूल परिस्थितियों में भी धैर्य बनाए रखा और ‘शॉर्ट लैंडिंग’ को एक सफल बचाव अभियान में बदल दिया।
पवन हंस भारत की प्रमुख सरकारी हेलिकॉप्टर सेवा प्रदाता है, जो दुर्गम और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए लाइफलाइन मानी जाती है। 1985 में स्थापित यह कंपनी वीआईपी और आम नागरिकों को हवाई सेवाएं प्रदान करती है, लेकिन हाल के वर्षों में इसके सुरक्षा मानकों पर सवाल उठते रहे हैं। इस ताजा घटना के बाद विमानन नियामक ने तकनीकी जांच के आदेश दे दिए हैं ताकि हादसे के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके। प्रशासन अब यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि ऐसी तकनीकी खामियां भविष्य में दोबारा न हों और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

