इंदौर: लोकायुक्त पुलिस ने नगर निगम के एक मामले में प्रदेश के दो आईएएस अधिकारियों सहित 5 लोगों पर प्रकरण दर्ज किया है. मामला उक्त अधिकारियों द्वारा संविदा इंजीनियर को नियम विरुद्ध योग्यता नहीं होने के बावजूद भवन अधिकारी के पद पर नियुक्ति देने का है.लोकायुक्त पुलिस ने आईएएस और पूर्व नगर निगम आयुक्त हर्षिका सिंह, स्मार्ट सिटी सीईओ दिव्यांक सिंह, संविदा यंत्री देवेश कोठारी तथा दो अन्य के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध किया है.
मामला इस प्रकार है कि स्मार्ट सिटी के कार्यो के लिए संविदा पर पदस्थ सिविल इंजिनियर को नगर निगम में नियमित भवन अधिकारी के पद की योग्यता नहीं होने के बाद भी पदस्थ किया गया. साथ ही विभिन्न प्रकार के अधिकार देकर उपकृत किया गया. वहीं इंजीनियर देवेश कोठारी ने संविदा सेवक होने के तथ्यों को छिपाकर भवन अधिकारी कि हैसियत से लगभग लगभग 250 नक्शे पास लिए. डिजिटल हस्ताक्षर से स्वीकृत नक्शे से अवैध रूप से धन अर्जित किया. झोन क्रमांक 13 पर भवन अधिकारी की हैसियत से नगर पालिक निगम 1956 और भूमि विकास नियम 2012 के प्रावधानों के विपरीत जाकर मौका निरीक्षण किया.
कोठारी ने वास्तविक तथ्यों को छिपाकर निर्माणाधीन सैकड़ों भवनों और पहले बने सैकड़ों भवनों को अवैध निर्माण होने के सूचना-पत्र देकर से वसूली की गई. भ्रष्टाचार करने के कारण किसी भी भवन से अवैध निर्माण हटाने की कार्रवाई नहीं की गई. तत्कालीन आयुक्त हर्षिकासिंह तथा स्मार्ट सिटी सीईओ को संविदा सेवक होने की शिकायत करने के बाद भी देवेश कोठारी को भवन अधिकारी के पद पर पदस्थ रखकर उसके विरुद्ध जांच करने की कारवाई नही की गई.
उक्त मामले में कांग्रेस के पूर्व पार्षद दिलीप कौशल और रवि गुरनानी ने लोकायुक्त में शिकायत की थी. शिकायत में कौशल ने भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 467, 336, 340, 61(2) एवं पीपी एक्ट की धारा 13(1)(डी) तथा 13(2) अनुसार अपराधिक प्रकरण दर्ज करने का आवेदन दिया था. सभी प्रमाणों सहित शपथ-पत्र पर शिकायत लोकायुक्त मध्यप्रदेश को बीएनएस 2023 की धारा 173 में एफआईआर दर्ज करने का आवेदन प्रस्तुत किया था. प्रारंभिक जांच के बाद लोकायुक्त मध्यप्रदेश ने शिकायत पर प्रकरण क्रमांक 31/ई/ 2025 पंजीबद्ध किया है.
