इंदौर: शहर में वर्ष 2023 से निर्माणाधीन 5 मंजिला कैंसर हॉस्पिटल अब तक पूरी तरह तैयार नहीं हो सका है. इस अस्पताल को अक्टूबर 2025 तक बनकर तैयार हो जाना था, लेकिन वर्तमान स्थिति में यहां अभी भी काफी काम बाकी है. निर्माण कार्य की धीमी गति को लेकर स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों के बीच चर्चा बनी हुई है.करीब 192 करोड़ रुपए की लागत से तैयार हो रहे इस अत्याधुनिक कैंसर हॉस्पिटल से क्षेत्र के मरीजों को बड़ी उम्मीदें हैं. अस्पताल भवन को आधुनिक चिकित्सा मानकों के अनुरूप डिजाइन किया गया है.
इसमें विशेष रूप से दो बड़े रेडिएशन बंकर बनाए जा रहे हैं, जहां कैंसर रोधी रेडिएशन मशीनें स्थापित की जाएंगी. ये दोनों बंकर 8 मीटर बाय 8 मीटर आकार के हैं. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इनमें 1 मीटर चौड़ी मोटी कंक्रीट की दीवारें बनाई जा रही हैं, ताकि रेडिएशन का प्रभाव बाहर न फैल सके और मरीजों व स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित हो. कैंसर उपचार में रेडिएशन थेरेपी की अहम भूमिका होती है. अस्पताल में आधुनिक ऑपरेशन थिएटर, डे-केयर कीमोथेरेपी यूनिट, उन्नत डायग्नोस्टिक सुविधाएं और पर्याप्त बेड की व्यवस्था भी प्रस्तावित है.
लगातार बढ़ रही मरीजों की संख्या
कैंसर हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. रमेश आर्य ने बताया कि अस्पताल बनने से मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी. उन्होंने कहा कि अभी प्रतिदिन ओपीडी में लगभग 100 से 125 मरीज पहुंच रहे हैं. मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन मौजूदा सुविधाएं सीमित हैं. खासकर गंभीर स्थिति वाले मरीजों के लिए पर्याप्त बेड उपलब्ध नहीं हैं. वर्तमान में केवल 7 क्रिटिकल मरीजों को ही भर्ती कर उपचार दिया जा सकता है. डॉ. आर्य के अनुसार नए भवन के तैयार होने के बाद 20 से अधिक गंभीर मरीजों को एक अलग मंजिल पर रखने की सुविधा उपलब्ध होगी. यह मंजिल विशेष रूप से क्रिटिकल केयर के लिए विकसित की जाएगी. कैंसर मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है, इसलिए उन्हें संक्रमण से बचाना बेहद जरूरी होता है. अलग मंजिल पर व्यवस्थित वार्ड और बेहतर निगरानी व्यवस्था होने से संक्रमण का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
अस्पताल निर्माण में देरी के कारण
अजय यादव कार्यपालन यंत्री पीआईयू लोकनिर्माण विभाग ने कहा कि अस्पताल निर्माण में देरी के मुख्य कारण नर्मदा लाइन का स्थानांतरण और पेड़ों का पुनरोपण रहे. इसके अलावा पुराने आवास को हटाने में भी समय लगा. पहले 80 बिस्तरों के ट्रॉमा सेंटर की योजना थी, जिसे बदलकर 321 बिस्तरों के अस्पताल में परिवर्तित किया गया. नई न्यूक्लियर मेडिसिन यूनिट के प्रावधान और योजना समायोजन में भी अतिरिक्त समय लगा. साथ ही ठेकेदार द्वारा अपेक्षित प्रगति नहीं करने पर उसकी स्लिपेज राशि में कटौती की गई और धीमी गति से काम करने पर नोटिस जारी किया गया.
निर्धारित मानकों के अनुरूप कर रहे कार्य
मशीनों को लेकर स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि शेष कार्य को प्राथमिकता के आधार पर तेजी से पूरा किया जा रहा है. तकनीकी और संरचनात्मक कार्यों को निर्धारित मानकों के अनुरूप ही किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की कमी न रह जाए. रेडिएशन बंकर जैसे संवेदनशील निर्माण कार्य में अतिरिक्त सावधानी बरती जा रही है, जिससे समय थोड़ा अधिक लगना स्वाभाविक है. अब सभी की निगाहें इस परियोजना के शीघ्र पूर्ण होने पर टिकी हैं. यदि निर्माण कार्य जल्द पूरा होता है तो यह कैंसर हॉस्पिटल क्षेत्र के हजारों मरीजों के लिए राहत की बड़ी सौगात साबित होगा
