
सिंगरौली। जिले में आज दिन सोमवार की दोपहर अचानक मौसम ने करवट ले ली। तेज आंधी के साथ झमाझम बारिश और ओलावृष्टि ने किसानों की चिंता बढ़ा दी। सरई और देवसर तहसील क्षेत्र के कई गांवों में ओले गिरने से चना, मसूर, सरसों, अरहर सहित गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। वहीं आम के बौर पर भी प्रतिकूल असर पड़ा है, जिससे आगामी फल उत्पादन पर संकट मंडराने लगा है। इस प्राकृतिक आपदा के बाद किसानों की धड़कनें तेज हो गई हैं और वे प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार आज दिन सोमवार को दोपहर करीब दो से तीन बजे के बीच अचानक तेज आंधी चली और इसके साथ ही बारिश शुरू हो गई। कुछ ही देर में ओले गिरने लगे, जिन्हें ग्रामीण पत्थर की तरह भारी बता रहे हैं। ओलावृष्टि से खेतों में खड़ी फसलें बिछ गईं। सरसों और चना की फलियां झड़ गईं, जबकि मसूर और अरहर की फसल को भी गंभीर क्षति पहुंची है। कई स्थानों पर गेहूं की बालियां टूट गईं। सरई और देवसर तहसील के पूरवा, खड़ौरा, गिधेर, कारी, मजौना तथा दक्षिणी बेल्ट के जुगनी, कोल्हुआ, सजहर, तीनगुड़ी, ठुकराल, पुरैल और बहेरा सहित अनेक गांवों में ओलावृष्टि का सीधा असर देखने को मिला है। इन गांवों में खेतों में पानी भर गया है और कई जगह फसलें जमीन पर गिर गई हैं। किसानों का कहना है कि मेहनत और लागत दोनों पर पानी फिर गया।
प्रभावित गांव का सर्वे कराये जाने की उठी मांग
इस बीच सामाजिक कार्यकर्ता बृजेश कुमार चतुर्वेदी ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित गांवों का तत्काल सर्वे कराया जाए और किसानों को हुई क्षति का आंकलन कर राहत राशि प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि मौसम की मार से पहले ही किसान महंगाई और लागत से परेशान हैं, ऐसे में फसल नुकसान की भरपाई जरूरी है। किसानों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा से बचाव उनके हाथ में नहीं है, लेकिन सरकार की जिम्मेदारी है कि संकट की घड़ी में उन्हें सहारा दे। ग्रामीण क्षेत्रों में यह चर्चा जोरों पर है कि यदि शीघ्र मुआवजा नहीं मिला तो किसान कर्ज के बोझ तले दब जाएंगे। कुल मिलाकर जिले में अचानक बदले मौसम ने खेती-किसानी को गहरा झटका दिया है। अब सभी की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं कि कब नुकसान का सर्वे होगा और कब किसानों को राहत मिलेगी।
चितरंगी में आंधी और बारिश का दिखा असर
इधर चितरंगी तहसील क्षेत्र में भी तेज आंधी और बारिश का असर देखने को मिला। हालांकि यहां ओलावृष्टि कम हुई, लेकिन हवा की रफ्तार तेज होने से आम के बौर झड़ गए और कुछ फसलों को नुकसान पहुंचा है। किसान रावेंद्र द्विवेदी ने बताया कि आम के बागों में इस समय बौर आने का समय होता है, लेकिन तेज हवा और बारिश से बड़ी संख्या में बौर गिर गए हैं। इससे आने वाले समय में आम की पैदावार प्रभावित हो सकती है। किसान रामकमल पांडेय ने बताया कि चना और सरसों की फसल लगभग तैयार अवस्था में थी। ओलावृष्टि के कारण फलियां टूट गईं और खेतों में बिछ गईं। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते सर्वे नहीं कराया गया, तो किसानों को बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा।
