नई दिल्ली | डिजिटल बैंकिंग के दौर में बैंक अकाउंट फ्रीज होना किसी भी ग्राहक के लिए बड़ी मुसीबत बन सकता है। बैंक आमतौर पर तब यह कदम उठाते हैं जब उन्हें खाते में किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि या धोखाधड़ी का अंदेशा होता है। अत्याधुनिक मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए बैंक असामान्य ट्रांजैक्शन पैटर्न पर नजर रखते हैं। यदि आपकी पहचान चोरी होने या अनधिकृत निकासी का संदेह होता है, तो बैंक ग्राहक के फंड को सुरक्षित रखने के लिए तुरंत खाते को फ्रीज कर देता है, जिससे न तो पैसे निकाले जा सकते हैं और न ही ट्रांसफर किए जा सकते हैं।
खाता बंद होने की एक मुख्य वजह सरकारी एजेंसियों या अदालत के आदेश भी हो सकते हैं। यदि आयकर विभाग या अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियां किसी जांच के सिलसिले में ‘गार्निशमेंट ऑर्डर’ जारी करती हैं, तो बैंक को अनिवार्य रूप से लेनदेन रोकना पड़ता है। इसके अलावा, एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग (AML) नियमों के तहत बैंक हर उस बड़े ट्रांजैक्शन की निगरानी करते हैं जो अवैध धन के लेन-देन या संदिग्ध गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है। जब तक ऐसी जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक खाते का एक्सेस पूरी तरह से प्रतिबंधित रहता है।
अकाउंट एक्टिव रखने के लिए ‘अपने ग्राहक को जानो’ यानी केवाईसी (KYC) नियमों का पालन करना सबसे जरूरी है। यदि कोई ग्राहक समय पर जरूरी दस्तावेज जमा नहीं करता या अपनी जानकारी अपडेट नहीं कराता, तो बैंक नियमों के तहत अकाउंट फ्रीज कर सकता है। इसके अलावा, खाते में अचानक बड़ी राशि का जमा होना या बार-बार हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन करना भी सुरक्षा की दृष्टि से बैंक को सतर्क कर देता है। इन परेशानियों से बचने के लिए जरूरी है कि आप अपने बैंकिंग दस्तावेजों को अपडेट रखें और किसी भी बड़े ट्रांजैक्शन की जानकारी बैंक को पहले से दें।

