तिरुवनंतपुरम | केरल में सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों ने राज्य सरकार पर डेटा प्राइवेसी के गंभीर उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कानूनी मोर्चा खोल दिया है। विवाद तब शुरू हुआ जब मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) द्वारा कर्मचारियों के व्यक्तिगत मोबाइल नंबरों पर महंगाई भत्ते (DA) से संबंधित व्हाट्सएप संदेशों की एक सीरीज भेजी गई। कर्मचारियों का आरोप है कि सरकार ने आधिकारिक ‘स्पार्क’ (SPARK) पोर्टल, जो केवल वेतन और सेवा रिकॉर्ड के लिए है, वहां से उनके निजी नंबर चोरी-छिपे निकाले हैं। कालीकट यूनिवर्सिटी सिंडिकेट के सदस्य रशीद अहमद सहित कई कर्मचारी अब इस मामले को लेकर केरल हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करने की तैयारी कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सरकार की सोशल मीडिया टीम ने लगभग 77.42 लाख लोगों के निजी डेटा का उपयोग किया है। इसमें 62 लाख पेंशनभोगी, 5.42 लाख सरकारी कर्मचारी और 10 लाख महिला सुरक्षा पेंशन लाभार्थी शामिल हैं। यह मामला 2023 के ‘डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम’ (DPDP Act) के सीधे उल्लंघन का संकेत देता है, क्योंकि किसी विशिष्ट कार्य के लिए एकत्र किया गया डेटा बिना सहमति के प्रचार उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। याचिकाकर्ता 2020 के ‘स्प्रिंकलर’ मामले के ऐतिहासिक फैसले को आधार बना रहे हैं, जिसमें कोर्ट ने डेटा सुरक्षा को लेकर कड़े निर्देश दिए थे।
कर्मचारियों का तर्क है कि ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ (DND) सेवा में पंजीकृत होने के बावजूद उन्हें ये अनचाहे मैसेज मिले, जो दूरसंचार नियमों का भी उल्लंघन है। रशीद अहमद ने कहा कि सरकार ने प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए दिए गए नंबरों का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ और भ्रामक प्रचार के लिए किया है, जबकि वास्तव में वेतन एरियर की भारी राशि रोकी गई है। विशेषज्ञों ने डर जताया है कि अगर इतने बड़े पैमाने पर आधिकारिक डेटाबेस का उपयोग प्रचार के लिए होता है, तो इसके डार्क वेब पर लीक होने का खतरा बढ़ जाता है, जिससे लाखों नागरिकों की सुरक्षा दांव पर लग सकती है।

