कोलकाता | पश्चिम बंगाल की राजनीति के दिग्गज नेता और पूर्व रेल मंत्री मुकुल रॉय का रविवार देर रात कोलकाता के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। 72 वर्षीय रॉय पिछले कुछ समय से गंभीर बीमारियों से जूझ रहे थे और अस्पताल में उपचाराधीन थे। उनके निधन की खबर मिलते ही बंगाल सहित पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है। मुकुल रॉय को बंगाली राजनीति का ‘चाणक्य’ माना जाता था, जिन्होंने पर्दे के पीछे रहकर तृणमूल कांग्रेस (TMC) को सत्ता के शिखर तक पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
मुकुल रॉय तृणमूल कांग्रेस के उन नौ संस्थापक सदस्यों में से एक थे, जिन्होंने ममता बनर्जी के साथ मिलकर पार्टी की नींव रखी थी। वे लंबे समय तक ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार रहे। उनके राजनीतिक कौशल का ही परिणाम था कि वे UPA-2 सरकार में जहाजरानी राज्य मंत्री और बाद में देश के रेल मंत्री बने। 2011 में जब बंगाल में ऐतिहासिक सत्ता परिवर्तन हुआ, तब मुकुल रॉय टीएमसी के संगठन की मुख्य धुरी थे। वे न केवल एक कुशल प्रशासक थे, बल्कि जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने की अद्भुत क्षमता रखते थे।
साल 2017 में मुकुल रॉय ने टीएमसी से अपने दशकों पुराने रिश्ते तोड़कर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया था, जिससे बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ। 2021 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने भाजपा के टिकट पर कृष्णानगर उत्तर सीट से जीत हासिल की, लेकिन चुनाव के बाद वे पुनः ममता बनर्जी की उपस्थिति में टीएमसी में वापस लौट आए। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से स्वास्थ्य कारणों के चलते वे राजनीति में अधिक सक्रिय नहीं थे। उनका निधन बंगाल की राजनीति के एक युग का अंत माना जा रहा है।

