गिद्धों की वापसी, रीवा वनमंडल में गिद्धो की संख्या पहुंची 669 सक्रिय घोसले मिले 25

रीवा। प्रदेशव्यापी शीत कालीन गिद्ध गणना वर्ष 2026 तीन दिन की गई. सुबह 6 बजे से लेकर 9 बजे तक बैठे हुए गिद्धो की गणना की गई. अंतिम दिन जिले में 669 गिद्ध पाये गये. जबकि प्रथम दिन 484 एवं दूसरे दिन 622 गिद्ध देखे गये थे. तीन दिन तक चली गणना रविवार को समाप्त हुई है. सबसे ज्यादा सेमरिया रेंज में गिद्ध पाये गये है. जबकि चाकघाट रेंज में न तो गिद्ध मिले और न ही सक्रिय घोसले देखे गये.

रीवा में विलुप्त के कगार पर पहुंच चुके गिद्धो की वापसी के संकेत जिलो के जंगलो में मिले है. गणना के लिये मोबाइल एप के जरिये हाईटेक तरीका अपनाया गया. वनकर्मियों के मोबाइल में अपलोड़ एप पर 12 तरह की जानकारियां फीड़ की गई. ड़ाटा सीधे भोपाल मुख्यालय भेजा गया. गौरतलब है कि शुक्रवार से गिद्धो की गणना जिले में शुरू हुई. प्रथम दिन 484 गिद्ध पाये गये और सक्रिय घोसले 29 थे. जबकि निष्क्रिय घोसले की संख्या 26 रही. दूसरे दिन 622 गिद्ध मिले और सक्रिय घोसले 30 थे, निष्क्रिय घोसले भी 30 थे. गणना के अंतिम दिन 669 गिद्ध मिले और 25 सक्रिय एवं 32 निष्क्रिय घोसले पाये गये. तीन दिन चली गणना में पूरी सावधानी बरती गई.

सबसे ज्यादा सेमरिया में मिले 432 गिद्ध

रीवा एवं मऊगंज जिले में गिद्ध की गणना हुई, जहा सबसे ज्यादा सेमरिया के जंगल में 432 गिद्ध पाये गये है. जबकि चाकघाट रेंज में एक भी गिद्ध नही मिले और न ही कोई घोसला पाया गया. अंतिम दिन हुई गणना में रीवा में 29, सिरमौर में 88, अतरैला में 9, मऊगंज में 112 गिद्ध मिले. मऊगंज में ही 7 राज गिद्ध पाये गये है. हनुमना में 73, चाकघाट में एक भी नही मिले. सेमरिया के जंगल में 430 गिद्ध पाये गये और यहा दो राज गिद्ध भी पाये गये. जबकि डभौरा में 19 गिद्ध देखे गये. इस तरह से रीवा-मऊगंज जिले में मिलाकर 669 गिद्ध गणना में पाये गये है. सबसे ज्यादा

ये प्रजातियां आई नजर

गिद्धो के लिये चलाये गये संरक्षण अभियान के सकरात्मक परिणाम सामने आये है. विलुप्त हो चुके गिद्धो को बचाने के लिये हर संभव प्रयास किया गया. यही वजह है कि गणना के अंतिम दिन जिले में 669 गिद्ध पाये गये. जिले के जंगलो में इंडियन गिद्ध, सफेद पीठ वाले गिद्ध, काला गिद्ध और इजिप्शियन गिद्ध देखे गये. सेमरिया में चारो प्रमुख प्रजातियां मिली. मऊगंज जिले के हनुमना में इंडियन व सफेद पीठ वाले गिद्ध दिखे. डभौरा में इंडियन लान्ग-बिल्ड व इजिप्शियन गिद्ध दर्ज हुए. अतरैला और मऊगंज में भी अलग-अलग प्रजातियां मौजूद रही.

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