टोक्यो, 22 फरवरी (वार्ता) मछलियों को लेकर किये गये एक अध्ययन में पाया गया है कि क्लाउनफिश सामाजिक हैसियत को दिखाने, खतरों से बचने और संचार के लिए अपने रंगों के पैटर्न और आकार का उपयोग करती हैं। जापान की ओकिनावा इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (ओआईएसटी) द्वारा किये गये इस अध्ययन की मुख्य लेखिका डॉ. लॉरी मिचेल बताती हैं, “हमने पहले दिखाया है कि एनीमोनफिश (क्लाउनफिश की ही एक प्रजाति) एक-दूसरे को पहचानने के लिए धारियों को गिनती हैं। इसलिए, हम जानते हैं कि क्लाउनफिश की विशेषता वाली ये सफेद ऊर्ध्वाधर धारियां संचार के लिए आवश्यक हैं।”
पीएलओएस बायोलॉजी जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार, कुछ एनीमोनफिश (क्लाउनफिश) प्रजातियां जब वे छोटी होती हैं तो उनके शरीर पर सफेद पट्टियाँ होती हैं। लेकिन लगभग एक-तिहाई प्रजातियों में ऐसा होता है कि जैसे-जैसे वे व्यस्क होती जाती हैं ये पट्टियाँ गायब हो जाती हैं। यह ज़्यादातर उन प्रजातियों में होता है जो छोटे समूहों में रहती हैं। छोटे समूहों में हर मछली का एक ‘रैंक’ या दर्जा होता है (कौन बड़ी है, कौन छोटी)। आकार का अंतर साफ दिखता है और अगर लड़ाई हो जाए तो छोटी मछली को ज़्यादा नुकसान हो सकता है। इसलिए शरीर के रंग और निशान (जैसे पट्टियाँ) यह संकेत देने में मदद करते हैं कि कौन किस दर्जे पर है। ऐसे ‘दृश्य संकेत’ लड़ाइयों को कम करने और सुरक्षित रहने में मदद करते हैं।
यह बदलाव कैसे और क्यों होता है, इसे समझने के लिए शोधकर्ताओं ने कैमरों का उपयोग करके उन एनीमोन (आवास) में किशोर मछलियों का अवलोकन किया जहाँ वयस्क मौजूद थे। वे यह जानकर हैरान रह गए कि वयस्कों की उपस्थिति में धारियां खोने की प्रक्रिया तेज हो गई, जबकि अतिरिक्त धारियां निम्न रैंक का संकेत देती हैं। डॉ. मिचेल कहती हैं, “यह शुरू में बहुत विपरीत लगा क्योंकि हम जानते हैं कि अतिरिक्त धारियों का उपयोग उनकी अधीनता को दर्शाने के लिए किया जाता है।” शोधकर्ताओं का सिद्धांत है कि उनकी ‘बेबी स्ट्रीप्स’ उन्हें कम खतरनाक दिखने और वहां पहले से मौजूद वयस्क मछलियों के साथ टकराव से बचने में मदद कर सकती हैं। लेकिन नए प्रतिद्वंद्वियों के आने से पहले, वे अपने नए समाज में अपनी स्थिति को मजबूत करने के लिए भी उत्सुक हो सकती हैं। शोधकर्ताओं का सुझाव है कि यही कारण हो सकता है कि वे अपनी धारियां जल्दी खो देती हैं। दूसरी ओर, खाली एनीमोन में मछलियाँ अपनी अतिरिक्त धारियों को अधिक समय तक रखती पाई गईं, संभवतः हमलावर वयस्कों द्वारा बेदखल किए जाने के खिलाफ एक ‘बीमा पॉलिसी’ के रूप में।

