पहले सडक़ फिर एंबुलेंस में शव रख सिटी ओवर ब्रिज किया जाम  सडक़ पर बैठकर टीआई ने दी समझाइश

जावरा। विधानससा की पिपलोदा तहसील में फांसी लगाने से पहले लक्ष्मीचंद्र पिता कनीराम भील ने आरोप लगाया था कि उसे झूठे मामले में फंसाया गया, सरपंच पक्ष के लोगों और आईए पुलिस ने सांठ-गांठ कर मारपीट की, जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया।

थाने में रातभर पीटा और दबाव बनाया गया कि किसी और का नाम ले ले, उसने अपनी शिकायत में लिखा था कि सरपंच के दबाव के कारण पुलिस उसकी नहीं सुन रही और उसे उल्टी गंभीर धमकियां दी जा रही हैं। फांसी लगाने से पहले अधेड युवक ने जिस टंकी पर फांसी लगाई वहा साफ-साफ सरपंच लिखा था। टंकी के चढ़ाव पर भी सरपंच लिखा दिखाई दे रहा हैं, वहीं टंकी के ऊपर भी जिसमें पुलिस नहीं सुनती हैं साफ साफ लिखा हैं। बाद मे किसी के कहने पर इन्हे बिगाडा गया। दोपहर 12 बजे के करीब सिविल अस्पताल में शव का पीएम होने के बाद आक्रोशित परिजन और समाज के लोग सिटी ओवर ब्रिज पर पहुंचे और सडक पर शव रखकर प्रदर्शन करने लगे।

आईए थाना प्रभारी विक्रमसिंह चौहान भी आक्रोशित लोगों के साथ सडक़ पर नीचे बैठ गए और समझाइश देने मे लग गए।

हालांकि शव को बाद में मौके पर खड़ी एंबुलेंस में रखवा दिया गया और सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार के मौके पर पहुंचते ही परिजनों ने ओवरब्रिज फिर से जाम कर दिया। आक्रोश बढ़ता देख जिला पुलिस कप्तान ने केवल एएसआई आशीष मांगरीया को लाइन अटैच करते हुए हरियाखेडा सरपंच को राउंड अप किया और पिता और भाई की तलाश शुरू कर दी।

इधर, जाम के चलते स्कूल से आने-जाने वाले बच्चों को परेशानियां उठानी पड़ी। एग्जाम होने के चलते बच्चे टिफिन भी नहीं ले गए थे। काफी देर तक जाम नहीं खुलने के बाद स्कूल वाहन फोरलेन होते हुए चौपाटी और सिटी क्षेत्र तरफ पहुंचे।

सरपंच राउंडअप, पिता और भाई की तलाश मे पुलिस:उल्लेखनीय है कि हरियाखेड़ा सरपंच को पूर्व में भी ईओडब्ल्यू ने रिश्वत मामले में ट्रेप किया था। ग्रामीणों के अनुसार मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला है, पुलिस अधिकारियों के अनुसार मामले में सरपंच जितेंद्र पिता पुरुषोत्तम, सरपंच के पिता पुरुषोत्तम पाटीदार और भाई लोकेश पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108, 3 (5) तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3 (2) (वीए) के तहत प्रकरण कायम किया है। सरपंच जितेन्द्र पाटीदार को राउंडअप कर लिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। ओवर ब्रिज पर सीएसपी युवराजसिंह चौहान, पिपलौदा तहसीलदार देवेन्द्र दानगढ़, नायब तहसीलदार वैभव जैन, ओद्योगिक क्षैत्र थाना प्रभारी विक्रमसिंह चौहान के साथ पुलिस व प्रशासनिक अधिकारी मौके पर मौजूद रहे।

आईए पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज ग्रामीण

गांव में तनाव का माहोल बन गया। परिजन और ग्रामीण आईए पुलिस की कार्यप्रणाली से नाराज हैं। प्रशासन के लिए यह मामला कानून-व्यवस्था की बड़ी चुनौती बनता दिख रहा हैं। परिजनों के अनुसार हरीयाखेडा निवासी मृतक लक्ष्मीचंद ने जिला पुलिस कप्तान के नाम नौ दिन पूर्व 12 फरवरी को शिकायत का आवेदन दिया था। आवेदन में बताया था कि 11 फरवरी की मध्य रात करीब 1 बजे वह खेत में फसल को पानी पिलाने का काम कर रहा था तभी अज्ञात चोर आए और खेत में लगी झटका मशीन से करंट की चपेट में आ गए। मेने जाकर तुरंत बटन दबाकर मशीन को बंद किया, तभी अचानक 8 से 10 युवकों ने मारपीट शुरू कर दी और खेत में लगी मशीने को कुएं में फेंक दिया। घटना के बाद सरपंच ने उल्टा मृतक पर ही चोरी का आरोप लगाकर थाने में बंद करवा दिया। जमानत मिलने के बाद युवक ने सरपंच और उनके परिवार के तीन लोगों के खिलाफ औद्योगिक क्षेत्र थाने में आवेदन दिया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

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