भोपाल में कांग्रेस की किसान रैली का नेतृत्व करेंगे खरगे और राहुल गांधी

नयी दिल्ली, 21 फरवरी (वार्ता) कांग्रेस भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में किसानों के साथ हो रहे कथित ‘अन्याय’ के विरोध में 24 फरवरी को मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एक विशाल किसान रैली आयोजित करेगी जिसमें पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे तथा लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी प्रमुखता से शिरकत करेंगे।

कांग्रेस ने शनिवार को एक बयान में कहा कि श्री खरगे और श्री गांधी के नेतृत्व में इस रैली के जरिए किसानों के हितों की रक्षा के लिए तथा भारत अमेरिका व्यापार समझौते में उनके साथ किये जा रहे अन्याय के खिलाफ मजबूती से देश के अन्नदाताओं की आवाज बुलंद की जाएगी।

पार्टी ने यह घोषणा हाल ही में घोषित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर तेज होते राजनीतिक विवाद के बीच की गयी है। कांग्रेस का आरोप है कि समझौते के कुछ प्रावधान भारतीय किसानों के लिए अत्यंत नुकसानदायक हो सकते हैं। पार्टी मानती है कि इस समझौते से किसानों को नुकसान होगा और इसका असर खासकर कृषि आयात, न्यूनतम मूल्य सुरक्षा और बाजार तक कृषि उत्पादों की पहुंच पर पड़ेगा और पाटी्र रैली के जरिए इन मुद्दों को किसानों के सामने रखेगी।

पार्टी का कहना है कि समझौते में यदि किसानों के हित के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय सुनिश्चित नहीं किए गए, तो छोटे और सीमांत किसानों को विदेशी कृषि उत्पादों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। पार्टी ने बातचीत की प्रक्रिया की समय-सीमा और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए हैं। कांग्रेस का कहना है कि भोपाल का यह कार्यक्रम “किसानों, कृषि श्रमिकों और नागरिक समाज की आवाजों को एकजुट करने” का मंच बनेगा, ताकि ऐसे “न्यायसंगत प्रावधानों” की मांग की जा सके जो भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रक्षा करें।

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और इसके आसपास के जिलों में बड़ी संख्या में कृषि आबादी निवास करती है। इस शहर को कार्यक्रम स्थल के रूप में चुनकर कांग्रेस संकेत दे रही है कि वह ग्रामीण मतदाताओं को लामबंद करने और किसान कल्याण को अपने अभियान का केंद्र बनाने की रणनीति पर काम कर रही है। यह रैली कांग्रेस की व्यापक जनसंपर्क रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत पार्टी किसानों और ग्रामीण समुदायों के बीच समर्थन मजबूत करना चाहती है।

दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि यह व्यापार समझौता निर्यात के अवसर बढ़ाएगा, निवेश को प्रोत्साहित करेगा और भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा। अधिकारियों के अनुसार, कृषि सहित संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त प्रावधान किये गये हैं। इन विपरीत रुखों के बीच भोपाल का कार्यक्रम व्यापार समझौते और उसके किसानों पर संभावित प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस को और तेज करने की संभावना है।

 

 

 

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