राघौगढ़:गेल विजयपुर की स्टोक चिमनी से यदा-कदा उठती आग और धुएं ने स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जली हुई प्राकृतिक गैस से फैलता यह प्रदूषण अब पर्यावरण और जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।सवा सौ फीट ऊंची स्टोक चिमनी से समय-समय पर उठती आग और धुआं पूरे क्षेत्र में रोशनी और धुंध का कारण बनता है।
रात में उठती लपटें राधौगढ़ से दिखती हैं, जिससे लोग दहशत और सवालों से घिर जाते हैं। चिमनी से निकलने वाली लगभग 40 से 56 टन जली हुई प्राकृतिक गैस न सिर्फ हवा को प्रदूषित कर रही है, बल्कि आसपास के गांवों के पर्यावरण को भी प्रभावित कर रही है।स्थानीय लोग और पूर्व मंत्री जयवर्धन सिंह लंबे समय से यहां CO₂ रिकवरी प्लांट की मांग कर रहे हैं, लेकिन गेल इंडिया द्वारा 37 वर्षों में भी ऐसा कोई प्लांट नहीं लगाया गया।
उधर, म.प्र. प्रदुषण नियंत्रण वोर्ड की कार्यवाही नोटिस तक ही सीमित रह जाती है। जब उस मुददे पर गेल के अधिकारियों से चर्चा करने का प्रयास किया तो उन्होने पल्ला झाड लिया। जबकि मापदण्ड यह है कि जिस क्षैत्र के स्थापित कारखाने का संतुलित अथवा असंतुलित पर्यावरण की जानकारी प्रदूषण नियंत्रण वोर्ड को होना चाहिये। म.प्र नियत्रंण वोर्ड क्षैत्रीय कार्यलय के अधिकारी दुरविजय सिंह जाटव का कहना है कि स्टोक चिमनी से जली हुई नेचुरल गैस निकालना मजबूरी है। दवे हुये शब्दो में उन्होने कहा कि प्रदूषण को लेकर हमने कई बार नोटिस भेज चुके है।
