गाजा सिटी | अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा गठित ‘बोर्ड ऑफ पीस’ ने गाजा के पुनर्निर्माण और सुरक्षा के लिए एक महत्वाकांक्षी खाका तैयार किया है। वॉशिंगटन में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इंडोनेशिया, मोरक्को और कजाकिस्तान जैसे देशों ने एक नई अंतर्राष्ट्रीय स्थिरता सेना (ISF) में अपने सैनिक भेजने पर सहमति जताई है। इस योजना के तहत लगभग 20,000 सैनिकों और एक नई पुलिस बल की तैनाती का प्रस्ताव है, जिसका उद्देश्य गाजा में शांति व्यवस्था कायम करना है। ट्रंप ने दावा किया है कि खाड़ी देशों सहित कई राष्ट्रों ने गाजा को फिर से बसाने के लिए सात अरब डॉलर से अधिक की सहायता का वादा किया है।
हमास ने स्पष्ट किया है कि गाजा के भविष्य से जुड़ी किसी भी राजनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत इजराइल की ‘आक्रामकता’ और हमलों के पूर्ण विराम के साथ होनी चाहिए। हमास के प्रवक्ता हाजेम कासिम के अनुसार, वे अंतर्राष्ट्रीय शांति सेना को केवल एक ‘बफर’ के रूप में स्वीकार करने को तैयार हैं, जो युद्धविराम की निगरानी करे और गाजा के आंतरिक मामलों में दखल न दे। दूसरी ओर, इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अपनी मांग पर अड़े हैं कि पुनर्निर्माण कार्य शुरू होने से पहले हमास का पूर्ण निरस्त्रीकरण अनिवार्य है, जिसे हमास ने सिरे से खारिज कर दिया है।
ट्रंप प्रशासन की इस ‘शांति योजना’ को लेकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशेषज्ञों ने संदेह जताया है। कुछ यूरोपीय नीति विश्लेषकों का मानना है कि इस बोर्ड के जरिए संयुक्त राष्ट्र (UN) को दरकिनार किया जा रहा है और फिलिस्तीनी आवाजों को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है। फ्रांस के विदेश मंत्री सहित कई विशेषज्ञों ने इसे एक ‘औपनिवेशिक प्रोजेक्ट’ करार दिया है, जो विदेशी आर्थिक मॉडल को गाजा पर थोपने की कोशिश कर रहा है। हमास के हथियार डालने की शर्त और फिलिस्तीनी इनपुट की कमी के कारण इस शांति योजना की व्यवहार्यता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

