शिवमोग्गा | कर्नाटक के दावणगेरे और शिवमोग्गा जिलों के हक्की-पिक्की आदिवासी समुदाय के 26 लोगों को अफ्रीकी देश घाना में स्थानीय अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया था। बिजनेस वीजा पर हर्बल उत्पाद बेचने गए इन भारतीयों पर वहां की फूड एंड ड्रग अथॉरिटी (FDA) ने बिना पंजीकरण वाली जड़ी-बूटियां बेचने का आरोप लगाया था। गिरफ्तार किए गए लोगों में 12 महिलाएं और 14 पुरुष शामिल थे, जिन्हें अकरा शहर के पास तीन दिनों तक हिरासत में रखा गया। घटना की जानकारी मिलते ही हक्की-पिक्की जनजातीय संगठन ने विदेश मंत्रालय से मदद की गुहार लगाई थी।
हक्की-पिक्की जनजाति के प्रदेश अध्यक्ष पुनीत कुमार ने बताया कि सोशल मीडिया के जरिए उन्हें इस मामले की भनक लगी, जिसके बाद उन्होंने तुरंत घाना स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क साधा। दूतावास ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्थानीय अधिकारियों से चर्चा की और जड़ी-बूटियों से जुड़ी कानूनी जटिलताओं को सुलझाया। भारतीय दूतावास के कड़े प्रयासों के बाद 19 फरवरी को सभी 26 भारतीयों को रिहा कर दिया गया। पुनीत कुमार ने संकट के समय त्वरित कार्रवाई के लिए भारत सरकार और दूतावास का आभार व्यक्त किया है।
रिहा हुए सभी भारतीय फिलहाल घाना में सुरक्षित हैं और उनकी वतन वापसी की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यह पहली बार नहीं है जब इस समुदाय के लोग विदेश में संकट में फंसे हों; इससे पहले भी 8 लोगों के वीजा रद्द होने पर केंद्र सरकार ने हस्तक्षेप कर उन्हें भारत वापस लाया था। पुनीत कुमार ने मांग की है कि सरकार को ऐसे पारंपरिक व्यापार के लिए अंतरराष्ट्रीय नियमों की जानकारी देने हेतु जागरूकता शिविर लगाने चाहिए, ताकि भविष्य में आदिवासी समुदाय के लोगों को विदेशी धरती पर कानूनी दिक्कतों का सामना न करना पड़े।

