साइबर सुरक्षा संस्थागत विश्वास की रक्षा का विषय-सूर्यकांत

जयपुर, (वार्ता) उच्चत्तम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने कहा है कि डिजिटल क्रांति ने अपार सुविधाएं प्रदान की हैं तथा इससे शासन, सेवाएं और संवाद पहले से कहीं अधिक सुलभ हुए हैं लेकिन इसके दुरुपयोग से होने से चुनौतियां उत्पन्न होती है। ऐसी स्थिति में साइबर सुरक्षा केवल बैंक खातों की सुरक्षा नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वास की रक्षा का भी विषय बन गई है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत शुक्रवार को जयपुर के राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर (आरआईसी) में ‘साइबर सुरक्षा- जागरूकता, संरक्षण एवं न्याय तक समावेशी पहुंच’ विषय पर आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि न्यायपालिका अपनी भूमिका निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी, ताकि इस खतरे को देश से समाप्त किया जा सके।

उन्होंने कहा कि “डिजिटल अरेस्ट” जैसी कोई न्यायिक प्रक्रिया अस्तित्व में नहीं है। यह पूर्णतः धोखाधड़ी का मामला है। उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक साइबर सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नागरिक शिक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा मानना होगा तथा इसके लिए सभी संस्थाओं को समन्वित साझेदारों की तरह मिलकर कार्य करना होगा।

उन्होंने कहा, ‘हमने बचपन से हमेशा सोचकर बोलो, समझकर कार्य करो।’ की एक सीख सुनी है। डिजिटल दुनिया में, जहां निर्णय एक क्लिक में लिए जाते हैं और पलक झपकते ही नुकसान हो सकता है, ऐसे में यह साधारण अनुशासन ही सुरक्षा का माध्यम बन जाता है।’ उन्होंने कहा कि साइबर सुरक्षा मूलतः उसी प्राचीन बुद्धिमत्ता का आधुनिक रूप है, जिसमें जागरूकता के साथ कार्य करना, सावधानी बरतना शामिल है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने राजस्थान में साइबर न्यायालय की स्थापना की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उन्होंने राजस्थान उच्च न्यायालय और राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के नवाचारों की सराहना करते हुए कहा कि राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण केवल सलाह तक सीमित नहीं है, बल्कि संस्थागत ढाँचा विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि न्याय तभी वास्तविक है जब वह सुलभ हो।

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