गिरदावरी की धीमी रफ्तार, बिना पंजीयन कराए लौट रहे किसान

सीहोर। समर्थन मूल्य पर गेहूं के उपार्जन के लिए इन दिनों पंजीयन का काम चल रहा है, पंजीयन के लिए केंद्रों पर किसान भी पहुंच रहे हैं, लेकिन उन्हें बिना पंजीयन ही वापस लौटना पड़ रहा है, क्योंकि अब तक गिरदावरी का काम पूरा नहीं हो पाया है. जहां गिरदावरी नहीं हो पाई है उनका पंजीयन नहीं हो पा रहा है. स्थिति यह है कि पिछले 13 दिनों में जिले में मात्र 11 हजार 932 किसानों के ही पंजीयन हो सके हैं। जबकि पिछले साल जिले में कुल 88 हजार 292 किसानों ने गेहूं के उपार्जन के लिए पंजीयन करवाए थे. पंजीयन की प्रक्रिया 7 मार्च तक चलेगी.

उल्लेखनीय कि जिले में इस बार अब तक गेहूं की बंपर पैदावार की उम्मीद है. किसानों को उनकी इस मेहनत का उचित फल मिल सके, इसके लिए शासन ने भी किसानों की उपज समर्थन मूल्य पर खरीदने की तैयारी शुरू कर दी है. समर्थन मूल्य पर गेहूं बेचने के लिए पंजीयन की प्रक्रिया 7 फरवरी से शुरू तो हो गई है, लेकिन इसके लिए जरूरी गिरदावरी नहीं होने से यह पंजीयन कार्य सुस्त गति से चल रहा है. पंजीयन शुरू होने की जानकारी के बाद किसान अपने नजदीकी केंद्रों पर पंजीयन के लिए पहुंच रहे हैं, लेकिन जैसे ही पंजीयन के लिए केंद्र पर मौजूद ऑपरेटर प्रक्रिया की शुरुआत करता है, बात गिरदावरी नहीं होने पर आकर अटक जाती है और किसानों को बरंग लौटना पड़ता है. जिले की बात करें तो रबी फसलों की गिरदावरी 1 फरवरी से शुरू हुई थी. अनुमान था कि पंजीयन प्रक्रिया शुरू होने से पहले इसे पूर्ण कर लिया जाएगा. लेकिन अब तक जिले में 50 फीसदी भी गिरदावरी नहीं हो पाई है. जो गिरदावरी हो रही है उसमें सभी प्रकार की फसलें शामिल हैं.

अब तक जिले में 11 हजार 932 किसानों ने पंजीयन करवाया है. इन किसानों ने अपने खाते की 24 हजार 951 हेक्टेयर भूमि के लिए पंजीयन करवाया है. पिछले साल जिले में 2 लाख 20 हजार 293 हेक्टेयर के लिए 88 हजार 292 किसानों ने पंजीयन करवाया था. इस साल अब तक सबसे ज्यादा पंजीयन श्यामपुर तहसील में 3160 किसानों के हुए हैं. सीहोर तहसील में भी 2 हजार 58 किसान पंजीयन करवा चुके हैं.

ऐसे हालातों में बढ़ाना पड़ सकती है तारीख

गौरतलब है कि शासन ने समर्थन मूल्य के लिए पंजीयन की अंतिम तारीख फिलहाल 7 मार्च तय की है. लेकिन इसकी सुस्त गति और पिछले सालों में जिले में हुए पंजीयन को देखते हुए यह अनुमान लगाया जा रहा है कि हर बार की तरह इस बार भी पंजीयन की अंतिम तारीख को आगे बढ़ाना पड़ेगा. दरअसल हर साल पंजीयन की तारीख में बार-बार संशोधन किया जाना भी कहीं न कहीं पंजीयन और इससे पहले गिरदावरी की सुस्ती का एक कारण माना जाता रहा है.

 

 

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