हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय ने मंदिर निधि के दुरुपयोग पर लगाई रोक , सरकार पुनर्विचार याचिका दायर करेगी

शिमला, (वार्ता) हिमाचल प्रदेश सरकार ने बुधवार को राज्य विधानसभा में संकेत दिया कि वह उच्च न्यायालय के उस हालिया फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेगी जिसमें मंदिर ट्रस्ट निधि को नागरिक कार्यों के लिए उपयोग करने पर रोक लगाई गई है।

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने यहां राज्य विधानसभा में कहा कि हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने फैसला सुनाया है कि राज्य सिविल कार्यों के लिए मंदिर ट्रस्ट निधि का उपयोग नहीं कर सकता है।

इसने राज्य सरकार, उपायुक्तों और मंदिर अधिकारियों को मंदिर निधि को सरकारी खजाने में स्थानांतरित करने या सामान्य विकास योजनाओं के लिए उपयोग करने से रोक दिया है।

शून्यकाल के दौरान उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने सदन को सूचित किया कि सरकार जल्द ही उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेगी, जो वर्तमान में सिविल निर्माण के लिए मंदिर ट्रस्ट निधि के उपयोग को रोकता है।

श्री नैना देवी निर्वाचन क्षेत्र में अस्पताल निर्माण के लिए बजट संबंधी बाधाओं को लेकर भाजपा विधायक रणधीर शर्मा की चिंताओं का जवाब देते हुए अग्निहोत्री ने कहा कि वे कानूनी रूप से इस परियोजना के लिए मंदिर ट्रस्ट निधि आवंटित करने से विवश हैं।

श्री शर्मा ने तर्क दिया कि अस्पताल से श्रद्धालुओं को भी लाभ होगा और इसलिए मंदिर निधि का उपयोग उचित है। हालांकि, स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनी राम शांडिल ने सदन को आश्वासन दिया कि अस्पताल के लिए धनराशि अलग से उपलब्ध कराई जाएगी और इस बात पर जोर दिया कि यह परियोजना जनहित में है। इस मुद्दे ने अब मंदिर ट्रस्टों पर राज्य की नियामक भूमिका को एक बार फिर न्यायिक जांच के दायरे में ला दिया है।

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