
जबलपुर। मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने बुधवार को नगर निगम भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन के विरुद्ध अवमानना की कार्रवाई निरस्त कर दी। जबकि एकलपीठ के समक्ष मूल याचिका पर सुनवाई जारी रहने की व्यवस्था दी है।
दरअसल इस मामले में एकलपीठ ने एकलपीठ ने निगमायुक्त को अवमानना का दोषी करार दिया था और उसकी सजा के लिए सुनवाई होनी थी। इसी बीच नगर निगम भोपाल व निगमायुक्त की ओर से युगलपीठ के समक्ष अपील दायर कर दी थी। नगर निगम आयुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस रूपराह, सुयश मोहन गुरू ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि हाईकोर्ट ने अवमानना की कार्रवाई शुरू करने का अधिकार तभी है जब न्यायालय के आदेशों का जानबूझकर उल्लंघन हुआ हो। मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड की पूरी याचिका में ऐसा कोई आरोप नहीं है कि नगर निगम ने उच्च न्यायालय या उसके अधीनस्थ किसी न्यायालय द्वारा पारित किसी आदेश या निर्देश का उल्लंघन किया हो। मामले में एकलपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा- निर्देशों की अनदेखी को गंभीर मानते हुए नगर निगम भोपाल की आयुक्त संस्कृति जैन को अवमानना का दोषी ठहराया था। न्यायालय ने स्पष्ट किया था कि नगर निगम द्वारा की गई तोडफ़ोड़ की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियत प्रक्रिया के अनुरूप नहीं थी। यह मामला मर्लिन बिल्डकान प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि नगर निगम ने 18 नवंबर 2025 को उसकी संपत्ति के फ्रंट हिस्से को विहित प्रक्रिया अपनाए बिना तोड़ दिया। नगर निगम की ओर से दलील दी गई कि निर्माण अवैध था। सात नवंबर 2024 को दी गई अनुमति निरस्त की जा चुकी थी। 14 मई 2025 को नोटिस जारी किया गया था। इसके बाद नियमानुसार कार्रवाई की गई।
