मध्य प्रदेश में विकास के नाम अन्धाधुंध पेड़ों की कटाई

जबलपुर। प्रदेश में विकास के नाम पर सदियों पुराने पेड़ों को काटे जाने के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की गयी थी। याचिका में कहा गया था कि देश के मध्य में मध्य प्रदेश एकमात्र राज्य है, जिसके वन क्षेत्र में कमी आई है। हाईकोर्ट जस्टिस संजीव सचदेवा तथा जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने संज्ञान याचिका के साथ उक्त याचिका की सुनवाई के निर्देश जारी किये है। याचिका पर अगली सुनवाई 18 मार्च को निर्धारित की गयी है।

भोपाल निवासी अजय दुबे की तरफ से दायर की गयी याचिका में कहा गया है कि मध्य प्रदेश में विकास के नाम पर पिछले 408 वर्ग किलोमीटर जंगल को काटा गया है। देश में मध्य भारत क्षेत्र में मध्य प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है कि जिसके वन क्षेत्र में कमी आई है। याचिका में राज्यसभा में प्रस्तुत की गयी रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया था कि मध्य प्रदेश में 228.53 लाख हैक्टेयर वन भूमि में अतिक्रमण है। मऊ-खंडवा के बीच रेलवे लाइन डालने के लिए वन क्षेत्र के एक लाख 24 हजार पेड़ों को काटा गया है।

याचिका में कहा गया था कि मध्य प्रदेश में साल 2026 में विकास के नाम पर 15 लाख पेड़ काटे जाने है। जिसमें से सौ-सौ साल पुराने पेड भी शामिल है। पेड़ काटने के एवज में पौधे लगाने के वादे खोखले है। पौधे की देखभाल नहीं की जाती है। प्रदेश में उज्जैन, भोपाल, सिंगरौली, विदिशा, रायसेन सहित अन्य जिले में जमकर पेड़ की कटाई जारी है। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद उक्त आदेश जारी किये। याचिकाकर्ता की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता आदित्य संघी ने पैरवी की।

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