मप्र बजट 2026-27 में नई योजनाओं की झड़ी: समृद्धि वन समृद्धि योजना से बढ़ेगी हरियाली और आय

भोपाल: मध्यप्रदेश के वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट प्रस्तावों में इस बार कई नई योजनाओं और कार्यों को शामिल किया गया है, जिनका उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास, पर्यटन संवर्धन, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और अधोसंरचना मजबूती के जरिए प्रदेश की अर्थव्यवस्था को गति देना है। सरकार ने वन, कृषि, शहरी विकास, सिंचाई, उद्योग और सामाजिक क्षेत्र में निवेश बढ़ाने के साथ निजी भागीदारी को भी प्रोत्साहन देने की रणनीति अपनाई है।

बजट में वन संरक्षण और आयवृद्धि को ध्यान में रखते हुए समृद्धि वन समृद्धि योजना के तहत वन भूमि से अतिक्रमण हटाकर पौधारोपण किया जाएगा। वहीं निजी भूमि पर पौधारोपण को बढ़ावा देने के लिए कृषि वानिकी योजना लागू की जाएगी, जिससे काष्ठ की जरूरतों की पूर्ति के साथ किसानों की आय बढ़ाने का लक्ष्य है। आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व वाले वन क्षेत्रों के संरक्षण हेतु “जनजातीय देवलोक वन संरक्षण योजना” भी प्रस्तावित है।
शहरी अधोसंरचना विकास के लिए “द्वारिका योजना” के अंतर्गत आगामी तीन वर्षों में 5 हजार करोड़ रुपये निवेश का प्रावधान किया गया है। पूंजीगत कार्यों में तेजी लाने के लिए इनविट, रीट और वैल्यू कैप्चर फंड जैसे वित्तीय उपकरणों के उपयोग का लक्ष्य रखा गया है। सामाजिक क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में सूचीबद्ध करने की तैयारी है।
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी से धार, बैतूल और पन्ना में नए मेडिकल कॉलेज स्थापित किए जाएंगे, जबकि भिंड, मुरैना, खरगौन, अशोकनगर, गुना, बालाघाट, टीकमगढ़, सीधी और शाजापुर में मेडिकल कॉलेजों की प्रक्रिया जारी है।पर्यटन के क्षेत्र में बुंदेलखंड और बघेलखंड अंचल को विशेष प्राथमिकता दी गई है। खजुराहो को वैश्विक प्रतिस्पर्धी पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा रहा है, वहीं ओरछा को आइकॉनिक पर्यटन स्थल योजना के तहत संवारा जा रहा है। सिंचाई के क्षेत्र में पतने-ब्यारमा सूक्ष्म दाब सिंचाई परियोजना के माध्यम से करीब ढाई लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होने का लक्ष्य है।
मालवा क्षेत्र में देवी अहिल्या लोक को सांस्कृतिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि केरियाखेड़ी महेश्वर और कुक्षी को क्राफ्ट एवं टूरिज्म विलेज के रूप में विकसित करने की योजना है। अधोसंरचना के तहत उज्जैन में 1000 करोड़ रुपये का एलिवेटेड कॉरिडोर, इंदौर-पीथमपुर आर्थिक कॉरिडोर पर 2360 करोड़ रुपये का निवेश तथा जबलपुर में 350 करोड़ रुपये की लागत से फ्लाईओवर निर्माण प्रक्रियाधीन है।
औद्योगिक विकास के तहत ग्वालियर में टेलीकॉम मैन्युफैक्चरिंग जोन स्थापित करने की दिशा में कार्य जारी है, जिससे देश को दूरसंचार क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में आबादी भूमि पर मालिकाना हक देने की योजना के तहत स्टांप एवं पंजीयन शुल्क राज्य सरकार वहन करेगी, जिसके लिए 3800 करोड़ रुपये का प्रावधान है।इसके अलावा विकसित भारत जी राम जी कार्यक्रम के लिए 10,428 करोड़ रुपये तथा यशोदा दुग्ध प्रदाय योजना के लिए 700 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। कुल मिलाकर बजट में पर्यावरण, पर्यटन, कृषि, स्वास्थ्य, उद्योग और सामाजिक सुरक्षा को संतुलित रूप से साधने की कोशिश दिखाई देती है।

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