मेडिकल छात्र की मौत का मामला हाईकोर्ट पहुंचा

जबलपुर: नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर के एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्र शिवांश गुप्ता की संदिग्ध मौत का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। शिवांश के पिता ने याचिका दायर कर आरोप लगाया गया है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि रैगिंग और प्रशासनिक लापरवाही के कारण हुई मौत का मामला है। मांग की गई कि इस मामले की जांच सीबीआई से या किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। मामले पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद जस्टिस बीपी शर्मा की एकलपीठ ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस मिडिल कॉलेज के वार्डन रविकांत महंत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले में गृह सचिव, जबलपुर के पुलिस अधीक्षक, गढ़ा थाने के एसएचओं को भी पक्षकार बनाया गया है।

गौरतलब है कि 4 जून को शिवांश हॉस्टल से बाहर गया और 5 जून को लौटा। सुबह लगभग 10.30 से 11.30 बजे के बीच वह हॉस्टल की छत पर किसी से फोन पर बात कर रहा था। करीब 11.45 बजे वह छत से नीचे गिर गया। उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गयाए जहां उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई। शिवांश के पिता संतोष कुमार गुप्ता की ओर से अधिवक्ता सुदीप सिंह सैनी व अमर प्रकाश गुप्ता ने पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि शिवांश ने वर्ष 2024 की नीट परीक्षा में 660 अंक प्राप्त किए थे। मध्यप्रदेश रैंक 734 के आधार पर उसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर में प्रवेश मिला था। वह प्रथम वर्ष एमबीबीएस का छात्र था।

पांच जून 2025 को परिजनों को सूचना मिली कि शिवांश घायल अवस्था में मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती है। परिजन जबलपुर पहुंचे, जहां 6 जून 2025 को इलाज के दौरान डॉक्टरों ने शिवांश को मृत घोषित कर दिया। पिता का दावा है कि 12 जून को कॉलेज परिसर पहुंचकर उन्होंने शिवांश के सहपाठियों से बातचीत की। आरोप है कि द्वितीय वर्ष के छात्र नयन साहू ने शिवांश के साथ रैगिंग और दुव्र्यवहार किया। एक प्रथम वर्ष की छात्रा से मित्रता को लेकर विवाद था। परिजनों का दावा है कि मई माह में शिवांश ने अपनी मां को बताया था कि नयन साहू ने स्थानीय लडक़ों को बुलाकर उसके साथ मारपीट की। डर के कारण उसने वॉर्डन या प्रशासन से शिकायत नहीं की। सुनवाई पश्चात् न्यायालय ने उक्त निर्देश दिये।

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