पॉक्सो और साइबर फॉरेंसिक की बारीकियों से रूबरू हुए अधिकारी, महिला अपराधों में दोषमुक्ति दर घटाने की तैयारी

भोपाल। मध्य प्रदेश पुलिस की महिला सुरक्षा शाखा द्वारा नवीन पुलिस मुख्यालय स्थित सभागार में “महिला अपराधों की विवेचना में सुधार” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य महिला एवं बाल अपराधों की विवेचना को अधिक प्रभावी, त्रुटिरहित एवं तकनीकी रूप से सुदृढ़ बनाना था।

कार्यशाला में प्रदेशभर से 62 पुलिस अधिकारी शामिल हुए, जिनमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (महिला सुरक्षा), उप पुलिस अधीक्षक, महिला थाना प्रभारी एवं उप निरीक्षक स्तर के विवेचक शामिल थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ विशेष पुलिस महानिदेशक (महिला सुरक्षा) अनिल कुमार द्वारा किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि विवेचना के दौरान दोनों पक्षों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए सभी साक्ष्यों का समुचित संकलन एवं विश्लेषण किया जाना चाहिए तथा पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध होने पर ही अभियोग पत्र प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने अधिकारियों को पूर्व मामलों के न्यायालयीन निर्णयों का अध्ययन कर त्रुटियों से सीख लेने की सलाह दी।

कार्यशाला में पीड़िताओं के प्रति संवेदनशील व्यवहार, दोषमुक्ति दर में कमी, साक्ष्य संकलन की मजबूती तथा पुलिस, अभियोजन और अन्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय पर चर्चा की गई। विषय विशेषज्ञों ने पॉक्सो अधिनियम, आयु निर्धारण, डीएनए सैम्पलिंग, साइबर फोरेंसिक, गवाह संरक्षण एवं पीड़ित अधिकारों पर विस्तृत जानकारी दी।

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