ढाका, 17 फरवरी (वार्ता) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने मंगलवार को यहां बंगलादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के बाद उनसे मुलाकात की और उन्हें प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ओर से भारत आने का निमंत्रण दिया। श्री रहमान को प्रधानमंत्री का पद संभालने पर बधाई देते हुए श्री बिरला ने भारत की ओर से सद्भावना और समर्थन व्यक्त किया। श्री बिरला ने श्री रहमान के शपथ ग्रहण समारोह में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने बाद में श्री रहमान से मुलाकात कर उन्हें प्रधानमंत्री मोदी की ओर से भारत यात्रा पर आने का औपचारिक निमंत्रण सौंपा। लोकसभा अध्यक्ष ने दोनों देशों के बीच साझा आकांक्षाओं और ऐतिहासिक संबंधों पर जोर देते हुए कहा, “भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिशील और समावेशी राष्ट्र के निर्माण के लिए बंगलादेश के प्रयासों का समर्थन करने के लिए तैयार है।” भारत में बंगलादेश के उच्चायुक्त रियाज़ हमीदुल्लाह ने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “माननीय अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रधानमंत्री से मुलाकात कर उन्हें भारत आने का निमंत्रण दिया। दोनों नेताओं ने मिलकर दोनों देशों की जनता की भलाई के लिए काम करने की आशा व्यक्त की। ” राजनयिक सूत्रों के अनुसार श्री बिरला की इस यात्रा से द्विपक्षीय सहयोग मजबूत होने की उम्मीद है।
भारत और बंगलादेश गहरे सांस्कृतिक, भाषाई और ऐतिहासिक संबंध साझा करते हैं, जो 1971 में बंगलादेश के मुक्ति संग्राम के बाद से काफी मजबूत हुए हैं। हाल के वर्षों में, संपर्क, व्यापार, ऊर्जा, जल बंटवारा, सुरक्षा और दोनों देशों के नागरिकों के बीच आदान-प्रदान के क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार हुआ है।
शपथ ग्रहण समारोह के इतर श्री बिरला ने मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू और भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे सहित कई क्षेत्रीय नेताओं से मुलाकात की। इन वार्ताओं में संसदीय आदान-प्रदान, क्षेत्रीय सहयोग और दक्षिण एशिया में साझा विकास प्राथमिकताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
पर्यवेक्षकों के अनुसार, बंगलादेश दक्षिण एशिया क्षेत्र में भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक बना हुआ है। रेल और सड़क संपर्कों से लेकर अंतर्देशीय जलमार्गों और ऊर्जा ग्रिडों तक की कनेक्टिविटी परियोजनाओं ने दोनों देशों के बीच एकीकरण को काफी बढ़ाया है, जिससे हाल के वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर तक भी पहुंचा। श्री बिरला की ढाका यात्रा भारत-बंगलादेश संबंधों में निरंतरता का संकेत देती है और आने वाले महीनों में दोनों सरकारों के बीच उच्च स्तरीय जुड़ाव का मंच तैयार करती है।

