जनविश्वास के संरक्षक और वित्तीय अनुशासन के प्रहरी होते हैं अधिकारी: मुर्मु

नयी दिल्ली 16 फरवरी (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सोमवार को कहा कि अधिकारी जनविश्वास के संरक्षक और वित्तीय अनुशासन के प्रहरी होते हैं। भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा , भारतीय व्यापार सेवा और रक्षा वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन सेवा के अधिकारी प्रशिक्षुओं ने यहां राष्ट्रपति भवन में
श्रीमती मुर्मु से भेंट की। अधिकारी प्रशिक्षुओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि प्रतिष्ठित सेवाओं में उनका चयन उन्हें राष्ट्र सेवा का अवसर प्रदान करता है और जब अधिकारी देश के विकास और प्रत्येक नागरिक के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य करते हैं, तब राष्ट्र और अधिक सशक्त, सक्षम तथा वैश्विक मंच पर सम्मानित बनता है। उन्होंने कहा कि कार्य के प्रति उनका उत्साह और समर्पण आने वाले भारत को बदलने की शक्ति रखता है।

भारतीय लेखा एवं लेखा परीक्षा सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे जनविश्वास के संरक्षक और वित्तीय अनुशासन के प्रहरी हैं। उन्होंने कहा कि जब कार्यपालिका और लेखा परीक्षा संस्थानों के बीच समन्वय होता है, तब शासन प्रणाली में जवाबदेही की रूपरेखा का प्रभाव और मूल्यवर्धन होता है। लेखा परीक्षा और कार्यपालिका के बीच प्रभावी साझेदारी से सार्वजनिक व्यय की दक्षता बढ़ती है और वांछित परिणामों में सहायता मिलती है। उन्होंने अधिकारियों से संविधान और सेवा की परंपराओं एवं मूल्यों को सदैव बनाए रखने का आग्रह किया। भारतीय व्यापार सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वे निवेश आकर्षित करने, रोजगार सृजित करने तथा भारतीय व्यवसायों को नवाचार, विस्तार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करने में योगदान देंगे। उन्होंने कहा कि उनका मार्गदर्शक सिद्धांत सदैव भारत का राष्ट्रीय हित होना चाहिए। उन्होंने सलाह दी कि वे याद रखें कि उनकी प्रत्येक नीति, प्रत्येक व्यापार बाधा का समाधान और प्रत्येक समझौता भारत को सशक्त और वैश्विक स्तर पर अधिक सम्मानित व्यापारिक साझेदार बनाने में योगदान देगा।

रक्षा वैमानिकी गुणवत्ता आश्वासन सेवा के अधिकारियों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि हमारे रक्षा बलों के लिए तकनीकी रूप से उन्नत और विश्वस्तरीय शस्त्र एवं गोला-बारूद के लिए सर्वोच्च गुणवत्ता मानकों को सुनिश्चित करना उनकी प्रमुख जिम्मेदारी है। उनकी भूमिका विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और राष्ट्रीय रक्षा के सशक्त संगम पर टिकी है। उन्होंने आग्रह किया कि अधिकारी हमारे सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से उन्नत, युद्ध के लिए तत्पर तथा बहु-क्षेत्रीय एकीकृत अभियानों में सक्षम बल के रूप में बदलने के लिए नवाचारी दृष्टिकोण अपनाएं।

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